Jabalpur High Court: बाघों की मौत पर MP के टाइगर रिजर्व पर सख्ती, हाईकोर्ट ने दिए ये बड़े आदेश
Jabalpur High Court: कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की संदिग्ध मौतों पर चल रही सुनवाई अब फंड और मानव संसाधन तक पहुंच गई है। जबलपुर हाईकोर्ट ने NTCA से मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व को पिछले 10 वर्षों में मिले फंड का वर्षवार रिकॉर्ड मांगा है।
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MP टाइगर रिजर्व पर जबलपुर हाईकोर्ट सख्त
Jabalpur High Court: कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की लगातार मौत का मामला अब व्यापक जांच और संसाधनों की उपलब्धता के सवाल से जुड़ गया है। जबलपुर हाईकोर्ट में बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान टाइगर रिजर्व की सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों की कमी और सरकारी फंडिंग पर विस्तार से चर्चा हुई। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस वीपी शर्मा की युगलपीठ ने नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) से मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व को पिछले 10 वर्षों में जारी किए गए फंड का पूरा रिकॉर्ड प्रस्तुत करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई सितंबर के अंतिम सप्ताह में होगी।
बाघों की मौत के पीछे वायरस की आशंका
जानकारी अनुसार, मुंबई के चेंबूर निवासी अधिवक्ता सुब्रत चक्रवर्ती की ओर से दायर याचिका में कान्हा में बाघों की मौत का मामला उठाया गया है। याचिका में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) की संभावित भूमिका पर चिंता जताई गई है। याचिका के मुताबिक अप्रैल 2026 में बाघिन सुनैना, बाघिन अमाही और उसके चार अर्धवयस्क शावकों की मौत हुई। इसके बाद 19 मई को युवा नर बाघ महावीर की भी जान चली गई। उसकी मौत में भी CDV की आशंका बताई गई। इसी दौरान बालाघाट और किसली क्षेत्र में दो अन्य वयस्क नर बाघ मृत मिले। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि लगभग एक महीने की अवधि में कान्हा क्षेत्र में आठ बाघों की मौत हुई।
खतरा सिर्फ कान्हा तक सीमित नहीं
साथ ही सुनवाई में यह आशंका भी सामने रखी गई कि अगर संक्रमण की वजह कैनाइन डिस्टेंपर वायरस है, तो इसका असर प्रदेश के अन्य टाइगर रिजर्व पर भी पड़ सकता है। ऐसे में सिर्फ कान्हा में निगरानी बढ़ाना पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
वहीं याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि कई टाइगर रिजर्व में लंबे समय से पद रिक्त हैं। कर्मचारियों की कमी के चलते वन्यजीवों की निगरानी, गश्त और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई गई।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद पद खाली
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अंशुमान सिंह और अधिवक्ता प्रतीक रूसिया ने टाइगर रिजर्व में खाली पदों का भी मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट नवंबर 2025 में रिक्त पदों को भरने को लेकर निर्देश दे चुका है, इसके बावजूद कई पद अब तक खाली हैं। हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
अब सामने आएगा 10 साल की फंडिंग का पूरा रिकॉर्ड
फिलहाल इस सुनवाई में सबसे महत्वपूर्ण निर्देश टाइगर रिजर्व की फंडिंग से संबंधित रहा। हाईकोर्ट ने NTCA से पिछले एक दशक में मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व को उपलब्ध कराई गई राशि का वर्षवार और विस्तृत विवरण मांगा है।
अगली सुनवाई में इस रिकॉर्ड से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि अलग-अलग वर्षों में टाइगर रिजर्व को कितना बजट मिला, उसका आवंटन किन मदों में हुआ और बाघों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए उपलब्ध संसाधनों की स्थिति कैसी रही।
