JPSC Protest Update: हेमंत सोरेन ने बनाई 4 मंत्रियों की समिति, फिर भी नहीं बनी बात; छात्रों का आंदोलन जारी
JPSC भर्ती परीक्षा विवाद को लेकर झारखंड में आंदोलन जारी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बातचीत के लिए चार मंत्रियों की समिति बनाई है, लेकिन छात्रों ने साफ कहा है कि वार्ता सीधे मुख्यमंत्री के साथ और मीडिया की मौजूदगी में ही होगी। CBI-ED जांच समेत अन्य मांगों पर भी छात्र अब तक अडिग हैं।
JPSC Protest Update
रांची। झारखंड में JPSC भर्ती परीक्षा विवाद को लेकर जो छात्र आंदोलन चल रहा है उसके बीच सरकार ने अब समाधान की दिशा में पहल वगैरा तेज़ कर दी है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों से बात करने के लिए चार मंत्रियों की समिति बना दी है, और आंदोलनकारियों को वार्ता का निमंत्रण भी भेजा गया है. मगर, अब तक “अंतिम सहमति” वाली बात नहीं पक्की हो पायी, कुछ न कुछ जगह अटक ही रहा है। छात्र बोल रहे हैं कि वो बातचीत के लिए तैयार हैं , लेकिन उनकी दो प्रमुख शर्तें ऐसी हैं जिन्हें पूरा करना जरूरी है. इसी बीच रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना और आमरण अनशन लगातार जारी है, जैसे समय गुजर भी रहा हो तब भी.
सरकार की पहल के बावजूद क्यों नहीं बनी सहमति?
बुधवार को एसडीओ कुमार रजत और एडीएम धनंजय कुमार मुख्यमंत्री का संदेश लेकर आंदोलन स्थल पहुंचे. सरकार की तरफ से छात्र प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता का प्रस्ताव रखा गया. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसके लिए चार मंत्रियों की समिति गठित की, जिसमें सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडेय सिंह, चमरा लिंडा और संजय प्रसाद यादव शामिल किए गए. फिर भी छात्र नेताओं का कहना है कि चर्चा सीधे मुख्यमंत्री के साथ ही हो, और बैठक के दौरान मीडिया प्रतिनिधि भी मौजूद रहें, ताकि बात पारदर्शी रहे।
13वें दिन भी धरना-आमरण अनशन जारी
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों का धरना 13वें दिन भी चलता रहा. छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो समेत छह छात्र आमरण अनशन पर बैठे हैं. आंदोलनकारी JPSC भर्ती परीक्षा विवाद की जांच CBI और ED से कराने की मांग पर जमे हैं. उनका यह तर्क है कि सिर्फ CID जाँच से उन्हें न्याय की उम्मीद लगना मुश्किल है. इसी क्रम में CID ने पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिसके बाद कुल गिरफ्तारियों की संख्या 19 हो गई है. यानी एक तरह से जांच का दायरा बढ़ता ही जा रहा है.
भर्ती विवाद ने कैसे पकड़ लिया तूल?
14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद चयन प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठने लगे. कट-ऑफ अंक सार्वजनिक नहीं किए जाने , कथित OMR शीट वायरल होने और रिजल्ट से जुड़े दूसरे विवादों के बाद मामला धीरे धीरे तूल पकड़ता गया. विरोध और तेज होने पर आयोग ने मुख्य परीक्षा रद्द कर दी. इसके बाद पूरे राज्य में अभ्यर्थियों का आंदोलन शुरू हो गया, फिर आंदोलन की लहर फैलती गई।
आगे की रणनीति… छात्रों की मांगों पर ही फोकस
आंदोलनकारियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच CBI और ED से हो, साथ ही फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाए. TDPL के जरिए कराई गई परीक्षाएं रद्द करने और कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की भी मांग उठ रही है. इसके अलावा भविष्य में हर परीक्षा किसी भरोसेमंद एजेंसी जैसे TCS से कराने की बात कही जा रही है, और जिन अधिकारियों पर आरोप हैं उनके खिलाफ कार्रवाई हो. फिलहाल सरकार बातचीत के रास्ते से समाधान निकालने की कोशिश कर रही है, लेकिन छात्र अपनी दो बड़ी शर्तों को लेकर अडिग बने हुए हैं.
