बुजुर्गों की सुरक्षा पर सख्त हुआ सुप्रीम कोर्ट, ट्रिब्यूनल और DM को दी बड़ी पावर
कानून व्यवस्था को मजबूत करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुजुर्गों की सुरक्षा पर बड़ा फैसला दिया है। लखनऊ के विकास नगर मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला पलटते हुए कोर्ट ने एसडीएम और ट्रिब्यूनल के बेदखली आदेश को सही ठहराया है।
सुप्रीम कोर्ट ने बुजुर्गों के हक में सुनाया बड़ा फैसला
देश में वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा (Security) और उनके खिलाफ होने वाले अपराधों पर लगाम कसने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद कड़ा कानूनी आदेश पारित किया है। कानून प्रवर्तन (Law Enforcement) के नजरिए से यह एक बड़ा फैसला है, जिसमें अदालत ने स्पष्ट किया है कि बुजुर्गों की सुरक्षा और सम्मान की रक्षा के लिए ट्रिब्यूनल को पूरी ताकत दी गई है। जरूरत पड़ने पर ट्रिब्यूनल बेटे-बहू या किसी भी अन्य रिश्तेदार को घर से बेदखल करने का सख्त आदेश जारी कर सकता है।
बेदखली के जरिए सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश
यह पूरा कानूनी विवाद लखनऊ के विकास नगर इलाके की एक प्रॉपर्टी से जुड़ा है। पुलिस और प्रशासनिक जांच के अनुसार, मकान के मालिक रवि कांत गुप्ता ने शिकायत दी थी कि उनके बेटे ने उनकी 81 वर्षीय मां (अपनी दादी) के लिए घर में असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया था। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि उस 81 वर्षीय बुजुर्ग महिला को सुरक्षा के अभाव में घर छोड़कर वृद्धाश्रम में जाना पड़ा। इसके बाद रवि कांत गुप्ता ने कानून का सहारा लिया और बेटे को अपनी संपत्ति से बेदखल करने की मांग उठाई।
एसडीएम, जिला मजिस्ट्रेट का एक्शन और हाईकोर्ट की रोक
कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने शुरुआत में तुरंत एक्शन लिया। एसडीएम और जिला मजिस्ट्रेट (DM) ने जांच पूरी करने के बाद मकान को रवि कांत गुप्ता की स्व-अर्जित संपत्ति पाया और बेटे-बहू को मकान खाली करने का कानूनी आदेश दे दिया। लेकिन इस कानूनी कार्रवाई को बेटे और बहू ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दे दी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले में दखल देते हुए बेदखली के इस आदेश को रद्द कर दिया था, जिससे बुजुर्गों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए थे।
अनुच्छेद 21 और 41 से मिला कानूनी कवच
जब इस सुरक्षा और बेदखली के आदेश की फाइल सुप्रीम कोर्ट पहुंची, तो जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने इसे गंभीरता से लिया। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए ट्रिब्यूनल के बेदखली आदेश को वैध ठहराया। अदालत ने कहा कि कानून का प्रमुख उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करना है। जजों ने संविधान के अनुच्छेद 21 और 41 का उल्लेख करते हुए साफ किया कि अगर किसी बुजुर्ग को अपने घर में असुरक्षा महसूस होती है, तो ट्रिब्यूनल कानून के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई (बेदखली) कर सकता है।