कानून के कटघरे में माननीय: सुप्रीम कोर्ट में पेश हुई रिपोर्ट, यूपी में सबसे ज्यादा 1171 केस लंबित
सुप्रीम कोर्ट में सांसदों-विधायकों के खिलाफ आपराधिक मुकदमों की रिपोर्ट पेश हुई है। जुलाई 2026 तक देश में 4,192 ट्रायल लंबित हैं। 14 मुख्यमंत्रियों और 170 लोकसभा सांसदों पर केस दर्ज हैं, जिनके लिए विशेष अदालतों की मांग की गई है।
14 मुख्यमंत्रियों पर संगीन केस! सुप्रीम कोर्ट में खुलासा
देश की कानून व्यवस्था (Law Enforcement) और न्यायिक कार्यप्रणाली पर पड़ रहे भारी दबाव की असली तस्वीर सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई एक रिपोर्ट से निकल कर सामने आई है, जैसे कि सब कुछ साफ़ साफ दिखता हो. इस रिपोर्ट में सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के ट्रायल और इन्वेस्टिगेशन की मौजूदा हालत बताई गई है, बिना किसी बढ़ा चढ़ा कर. 28 राज्यों के पुलिस और अदालती रिकॉर्ड को आधार मान कर 14 मुख्यमंत्रियों पर गंभीर केस लंबित पाए गए हैं. कानून प्रवर्तन एजेंसियों के डेटा की मानें तो तेलंगाना के सीएम ए. रेवंत रेड्डी सबसे आगे दिखते हैं, 89 आपराधिक मामलों के साथ वो टॉप पर हैं.
कानूनी रडार पर दिग्गज चेहरे, जांच के घेरे में कई नाम
न्यायिक जांच के दायरे में कई बड़े चेहरे शामिल हैं. पुलिस रिकॉर्ड्स के मुताबिक सुवेंदु अधिकारी पर 29, डीके शिवकुमार और चंद्रबाबू नायडू पर 19-19 केस दर्ज हैं. केरल के वी.डी. सतीशन के खिलाफ 18 मामलों की जांच/ट्रायल जारी है। झारखंड के हेमंत सोरेन (5 मामले), देवेंद्र फडणवीस (4) और सुखविंदर सिंह (4) भी कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं. बाकी कई मुख्यमंत्रियों पर भी 1-2 केस दर्ज बताए गए हैं, पर संख्या कम दिखती है, फिर भी सवाल वही रहते हैं.
राज्यों का लॉ एंड ऑर्डर, और संसद के आंकड़े साथ साथ
विधानसभाओं में बैठे माननीयों का आपराधिक बैकग्राउंड कानून व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती की तरह पेश हो रहा है. पश्चिम बंगाल विधानसभा (292 सीटें) में 170 विधायक गंभीर मामलों में फंसे बताए गए हैं. केरल में 57% , आंध्र प्रदेश में 56% और तेलंगाना में 49% विधायकों पर गंभीर केस दर्ज होने का उल्लेख है. बिहार, महाराष्ट्र, झारखंड और ओडिशा का हाल भी लगभग इसी दिशा में माना जा रहा है. वहीं 543 सदस्यीय लोकसभा में 170 सांसद (31%) जांच एजेंसियों और अदालतों के रडार पर हैं. तेलंगाना, केरल और बिहार के सांसद इनमें प्रमुख दिखाई देते हैं. राज्यसभा (233 सदस्य) में 75 सांसदों पर केस बताए गए हैं, जिनमें 40 मामले अति गंभीर प्रकृति के बताए जाते हैं.
4,192 मामलों का ट्रायल, स्पेशल अदालतों की मांग उठी
कानूनी डेटाबेस के अनुसार जुलाई 2026 तक पूरे देश में 4,192 क्रिमिनल केस ट्रायल स्टेज पर लंबित हैं. इनमें 1,171 मुकदमों के साथ उत्तर प्रदेश की अदालतों पर सबसे ज्यादा भार बताया गया है. इन लंबित मुकदमों की फास्ट ट्रैक जांच और सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अदालतों के साथ साथ सीधे हाईकोर्ट की मॉनिटरिंग की गुहार उठाई गई है. फिर भी कानून के बुनियादी सिद्धांत की बात करें तो, अंतिम फैसला अदालत से आने तक किसी व्यक्ति पर सिर्फ मामला लंबित होना उसे दोषी साबित नहीं करता, ये बात बार बार दोहराई जाती है.