Law and Order Crisis: बलूचिस्तान से PoJK तक चरमराई सुरक्षा व्यवस्था, अपनी नाकामी छिपाने को भारत को धमका रहे शहबाज शरीफ
पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। 12 अगस्त को बलूचिस्तान में कार बम ब्लास्ट, 2 अगस्त को स्वात में पुलिस स्टेशन पर आत्मघाती हमला और PoJK में हिंसक झड़पों के बीच, शहबाज शरीफ सिंधु जल संधि (1960) को लेकर भारत को चेतावनी दे रहे हैं।
Threat from Pakistan PM Shehbaz Sharif
सीमा पार आतंकवाद और अंदरूनी सुरक्षा व्यवस्था पर Law and Enforcement वाले भारी दबाव के बीच, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 14 अगस्त से पहले इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान भारत को खुली… लगभग सीधी चेतावनी दे दी। पानी को उसने अपनी “national security” का मसला और “रेड लाइन” कहकर, शरीफ ने साफ कहा कि पानी से जुड़े जिस भी कदम का जवाब दिया जाएगा। फिर उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि भारत एकतरफा तरीके से सिंधु जल संधि रोककर शांति का दुश्मन बन गया है। हालांकि security विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान खुद सुरक्षा के हर मोर्चे पर पूरी तरह से पीछे रह गया है, और मानो सिस्टम टूट चुका है।
CCS की बैठक, और पहलगाम हमले के बाद भारत का सुरक्षा एक्शन
भारत ने सिंधु जल संधि पर जो कड़ा रुख अख्तियार किया, उसे भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से ही जोड़ा जा रहा है। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए भयंकर आतंकी हमले में 26 लोगों की जान चली गई, उसके बाद भारत सरकार ने सुरक्षा की प्राथमिकताओं में तेज बदलाव किया। 23 अप्रैल को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की आपात बैठक हुई, और उसमें 1960 वाले इस पानी के समझौते को स्थगित करने का निर्णय लिया गया। भारत का संदेश पाकिस्तान के लिए सीधा और सख्त रहा है कि जब तक सीमा पार आतंकवाद पर रोक नहीं लगेगी, तब तक बातचीत का कोई सवाल नहीं है।
बलूचिस्तान में सेना का ऑपरेशन , और 12 अगस्त का कार बम ब्लास्ट
पाकिस्तान की अंदरूनी कानून-व्यवस्था जिस हालत में दिखती है, वहां बलूचिस्तान में लगातार मिलिट्री ऑपरेशन चलते रहे हैं। 12 अगस्त को सुरक्षा बलों ने एक बड़े अभियान के तहत 10 आतंकवादियों को मारने का दावा किया, लेकिन उसी दिन सुराब इलाके में पुलिस व खुफिया तंत्र की बड़ी चूक सामने आई। जब एक कार बम समय से पहले ही ब्लास्ट हो गया। उस हादसे में 8 हथियारबंद लोगों के साथ 3 नागरिकों की भी मौत हो गई। मानवाधिकार हनन के आरोपों के बीच बलूच राष्ट्रवादी समूहों ने 14 अगस्त को पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस को “ब्लैक डे” की तरह मनाने का ऐलान किया, साथ में काले झंडे फहराने और काली पट्टी बांधने की बात भी कही , जिससे पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया।
काबल पुलिस स्टेशन के बाहर आत्मघाती हमला
खैबर पख्तूनख्वा के स्वात क्षेत्र में पुलिस बल की सुरक्षा खुद चुनौती में है। 2 अगस्त को काबुल पुलिस स्टेशन के पास एक बेहद खौफनाक आत्मघाती हमला हुआ। इसमें 17 लोगों की मौत हुई, जबकि 34 घायल बताए गए। खास तौर पर यह बात चुभती है कि ब्लास्ट उस दौरान हुआ जब स्थानीय नागरिक बढ़ती आतंकी गतिविधियों के खिलाफ पुलिस से सुरक्षा की मांग कर रहे थे , यानि मौजूद माहौल विरोध प्रदर्शन वाला था और जोखिम उस पर ही टूट पड़ा।
PoJK में सुरक्षा बलों से झड़पें और इंटरनेट सस्पेंशन
कानून-व्यवस्था का सबसे खराब असर पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में दिखता है। यहां Joint Awami Action Committee (JAAC) के प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच जुलाई के अंत में हिंसक झड़पें हुईं। पुलिस को इंटरनेट ठप करना पड़ा , और आवाजाही पर भी रोक लगानी पड़ी। राजनीतिक अधिकार और चुनावी व्यवस्था को लेकर हुए इन उग्र प्रदर्शनों के कारण प्रशासन को अगस्त के चुनाव के आखिरी चरण को टालना पड़ा। वहीं जेल में बंद इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) और JAAC ने चुनावी प्रक्रिया के बहिष्कार तक की भूमिका ले ली। नतीजा यह हुआ कि सरकार और विपक्ष की इस खींचतान में पाकिस्तान की पूरी security architecture लगभग हाशिए पर आ गई है।