मध्य प्रदेश में वन पर्यटन, वन्यजीव आदान-प्रदान और 30 विकास प्रस्तावों का डेटा विश्लेषण: बोर्ड की 32वीं बैठक के तकनीकी और सांख्यिकीय तथ्य
मध्य प्रदेश राज्य वन्य प्राणी बोर्ड की 32वीं बैठक में प्रस्तुत किए गए आंकड़ों और प्रस्तावों के आधार पर वन्यजीव प्रबंधन, ढांचागत विकास और आर्थिक प्राथमिकताओं का विस्तृत विश्लेषण सामने आया है। इस रिपोर्ट में वन्यजीव आदान-प्रदान और 30 विकास प्रस्तावों से जुड़े तकनीकी तथ्य दिए गए हैं।
CM at the M.P. State Wildlife Board meeting
मध्य प्रदेश के आर्थिक और पारिस्थितिक विकास वाले महत्वपूर्ण आंकड़ों और रणनीतिक फैसलों के हिसाब से राज्य में वन पर्यटन को बढ़ावा देने की रूपरेखा तैयार की गई है. मंगलवार को मंत्रालय में मुख्यमंत्री डॉ . मोहन यादव की अध्यक्षता में जो मध्य प्रदेश राज्य वन्य प्राणी बोर्ड की 32वीं बैठक हुई, उसी में रखे गए आंकड़े और प्रस्ताव देखकर वन्यजीव प्रबंधन, ढांचागत विकास और आर्थिक प्राथमिकताओं का एक मोटा पर विस्तृत नक्शा सामने आया. इस बैठक में तकनीकी प्राथमिकताओं और डेटा-आधारित रणनीतियों पर, खास तौर पर जोर दिया गया था , मानो सब कुछ रिकॉर्ड्स के आधार पर ही आगे बढ़ाना हो.
वन्यजीव आदान-प्रदान और प्रजाति डेटा के छोटे बड़े संकेत
वन्यजीवों के संरक्षण और जैव विविधता के संतुलन को लेकर राज्यों के बीच एक तरह का आदान-प्रदान वाला डेटा तैयार किया गया है. मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार, मध्य प्रदेश से बाघ (Tiger) दूसरे राज्यों को दिए जाएंगे, और बदले में वहां से वयस्क, तथा पूरी तरह स्वस्थ अन्य वन्यजीव लाए जाएंगे. इसे लेकर जिन लक्षित राज्यों पर ध्यान टिका है उनमें आंध्र प्रदेश, असम और कर्नाटक के नाम सामने आ रहे हैं. वहां से खासकर हाथी (Elephant), गैंडा (Rhinoceros) और कुछ दूसरे वन्यजीवों को मध्य प्रदेश लाने की बात सोची जा रही है, ताकि राज्य के वन्यजीव डेटा, और उसकी पारिस्थितिकी वाला आधार थोड़ा और मजबूत, ज्यादा समृद्ध बन सके.
बोर्ड के सामने रखे गए 30 विकास प्रस्तावों का सांख्यिकीय लेखा-जोखा
राष्ट्रीय उद्यानों (National Parks) और टाइगर रिजर्व (Tiger Reserves) के आसपास के प्रशासनिक और बुनियादी ढांचे से जुड़े कुल 30 प्रस्ताव बोर्ड के समक्ष विचार के लिए रखे गए थे. इन प्रस्तावों को सांख्यिकीय और विकासात्मक तौर पर मंजूरी भी मिल गई. इन 30 स्वीकृत प्रस्तावों के भीतर तकनीकी स्तर पर जिन विकास कामों का उल्लेख था वो कुछ इस तरह हैं,
वन ग्रामों में सीसी सड़कों (CC Roads) का निर्माण
टाइगर रिजर्व के वन ग्रामों में पक्की सड़कों का विकास
मोबाइल टावर (Mobile Towers) की स्थापना
उप स्वास्थ्य केंद्रों (Sub-Health Centres) का निर्माण
बिजली लाइनों (Electricity Lines) से जुड़ी ढांचागत सुविधाएं
क्षेत्रीय, और जनसांख्यिकीय संतुलन की तरफ इशारे करते तकनीकी निर्देश
प्रशासनिक आंकड़ों और नियमों के पालन को लेकर मुख्यमंत्री ने सख्त निर्देश दिए. उनका कहना था कि वन भूमि के उपयोग या उसके डायवर्सन पर तकनीकी नजर, लगातार बनी रहे, ताकि किसी भी सूरत में वन क्षेत्रों में अवैध उत्खनन न हो सके. इसके साथ ही, टाइगर रिजर्व और राष्ट्रीय उद्यानों की सीमा के आसपास आने वाले वन ग्रामों की स्थानीय आबादी को विश्वास में लेकर विकास कार्य करने के आदेश भी दिए गए, ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) का जोखिम कम रहे. साथ ही ये भी प्रावधान किया गया है कि विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए, और विशेषज्ञ सेवाओं को और प्रभावी बनाने के लिए केंद्र सरकार और राज्य के पुरातत्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को बोर्ड में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया जाए, ताकि चर्चा, और निर्णय दोनों ज्यादा तथ्यात्मक रहे.