खनन संशोधन विधेयक पारित और हल्द्वानी विवाद के साए में समाप्त हुआ संसद का मानसून सत्र, लोकसभा की कार्यवाही महज 4 मिनट चली
संसद का मानसून सत्र शुक्रवार को भारी गतिरोध के बीच समाप्त हो गया। राज्यसभा में जहां खनन संशोधन विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया, वहीं लोकसभा की कार्यवाही महज चार मिनट में सिमट गई।
Monsoon Session 2026 Concludes
नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र शुक्रवार को… खैर भारी हंगामे और बीच बीच के गतिरोध के साथ अनिश्चितकाल के लिए खत्म हो गया। सत्र के आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह दोनों सदन में मौजूद रहे, लेकिन राष्ट्रगीत की धुन जैसे ही बजी लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। उस मौके पर लोकसभा की कार्यवाही महज चार मिनट से भी कम समय तक ही चल पाई, जबकि उच्च सदन यानी राज्यसभा की बैठक लगभग एक घंटा तक जारी रही।
राज्यसभा में खनन कानून पलटा, राज्यों को केंद्र की “अनुमति” फिर से चाहिए
राज्यसभा में खासी हलचल के बीच विधाई कामकाज आगे बढ़ाते हुए खनन कानून में संशोधन से जुड़े विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। नए प्रावधानों के अनुसार अब राज्यों द्वारा खनिज और खदानों पर किसी भी तरह का अतिरिक्त कर, शुल्क या सेस लगाना हो तो उससे पहले केंद्र सरकार से औपचारिक अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
लोकसभा में फिर ठप रहा काम , छात्र आंदोलन को लेकर चर्चा नहीं
मानसून सत्र की शुरुआत 20 जुलाई से हुई थी और इस दौरान लोकसभा में विपक्षी दलों का जोरदार प्रदर्शन चलते हुए कोई ठोस कामकाज नहीं हो सका। विपक्ष लगातार छात्र आंदोलन के वक्त संसद मार्च पर हुए कथित लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल का मुद्दा उठाता रहा। उनका सवाल था आखिर लाठीचार्ज का आदेश किसने दिया था। हालांकि बुधवार को गृहमंत्री अमित शाह ने यह भी कहा था कि अगर विपक्ष सदन की कार्यवाही चलने दे, तो वे हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हैं, मगर सत्र के अंतिम दिन भी लोकसभा में इस मसले पर चर्चा नहीं हो पाई।
मल्लिकार्जुन खरगे के “शुद्धिकरण” वाले बयान पर सदन में गर्म बहस, माहौल गरम
सत्र के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा उठाए गए एक और मुद्दे ने सदन का पारा चढ़ा दिया। खरगे ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में अपने एक कार्यक्रम के बाद सभास्थल के कथित “शुद्धिकरण” और हवन करवाए जाने का मामला उठाया। उन्होंने इसे सीधे तौर पर दलित समाज के अपमान से जोड़ते हुए पूछा कि उनके वहां से जाने के बाद ऐसी प्रक्रिया की जरूरत क्यों पड़ी। इसके बाद सदन में काफी तीखी नोकझोंक हुई। स्थिति को संभालते हुए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने सदन को यह भरोसा दिलाया कि सरकार इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाएगी, और इस संवेदनशील मुद्दे पर किसी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए।
सत्र के आंकड़े , और “विशेष सत्र” को लेकर राजनीतिक अनुमान
सभापति सीपी राधाकृष्णन की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, राज्यसभा ने इस मानसून सत्र के दौरान कुल 37 घंटे 49 मिनट तक काम किया। अब जब सत्र औपचारिक तौर पर अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया है तो राजनीतिक गलियारों में भविष्य में एक विशेष सत्र बुलाए जाने को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसके अलावा, सत्र खत्म होने के बाद सभी प्रमुख दलों के वरिष्ठ नेता लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से औपचारिक मुलाकात करने पहुंच सकते हैं, ऐसी खबरें भी सामने आ रही हैं।