BRICS Culture Conference: सांस्कृतिक विरासत और वैश्विक सहयोग पर मंथन, भोपाल में जुटेंगे कई देशों के प्रतिनिधि
BRICS संस्कृति सम्मेलन के स्वागत के लिए भोपाल की प्रमुख सड़कों को मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत दर्शाने वाली कलाकृतियों और पारंपरिक चित्रों से सजाया गया है।
Bhopal BRICS Cultural Conference
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल 5 से 8 अगस्त तक होने वाले ब्रिक्स संस्कृति सम्मेलन के लिए मानो तैयार सा है। कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में कई देशों के संस्कृति मंत्री और उनके प्रतिनिधि शामिल होंगे, या कहें, आएंगे। इस बार का सम्मेलन सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक समन्वय को और ज्यादा मजबूत करने , साझा विरासत के संरक्षण पर चर्चा करने और सांस्कृतिक संवाद को एक नई दिशा देने के मकसद से रखा गया है। इसी दौरान भारत की संस्कृति, परंपराओं और सभ्यता की रंग-बिरंगी विविधता को भी वैश्विक मंच पर सामने लाया जाएगा।
‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ से दुनिया को एकता का संकेत
सम्मेलन की थीम सनातन संस्कृति के उस मूल संदेश पर टिकी है— ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’। इस विषय के जरिए विश्व शांति, समरसता, सांस्कृतिक एकजुटता और मानव कल्याण की बात कही जाएगी, ठीक वैसे ही जैसे पुराने समय की कोई पंक्ति आज भी असर रखती है। भारत के अलावा ब्राजील, इथोपिया, इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात, दक्षिण अफ्रीका, क्यूबा, थाईलैंड और बेलारूस जैसे देशों के प्रतिनिधि भी सम्मेलन में शामिल होंगे। अलग-अलग राष्ट्रों से आने वाले प्रतिनिधि संस्कृति, विरासत संरक्षण और आने वाले समय में सहयोग जैसे मुद्दों पर अपने विचार साझा करेंगे, जिन पर सबकी नज़र होगी।
भोपाल में झलकेंगे मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक रंग
ब्रिक्स संस्कृति सम्मेलन के स्वागत के लिए राजधानी भोपाल को आकर्षक ढंग से संवारा जा रहा है। वीआईपी रोड, भोज सेतु, एयरपोर्ट रोड, गांधी नगर, पॉलीटेक्निक चौराहा, और मिंटो हॉल तक के बड़े मार्गों पर रंग-रोगन किया गया है। साथ ही, कई जगहों पर पारंपरिक कला और सांस्कृतिक विरासत को दिखाती सुंदर पेंटिंग भी तैयार की जा रही हैं , बस अब बस अंतिम रूप में।
इन कलाकृतियों में मध्य प्रदेश की धार्मिक आस्था, लोक परंपराएं, और ऐतिहासिक पहचान को खास तौर पर उकेरा गया है। शहर की ये सजावट देश-विदेश से आने वाले मेहमानों को प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर से रू-ब-रू कराएगी, कुछ हद तक महसूस भी कराएगी।
भारत की सांस्कृतिक विविधता को मिलेगा वैश्विक मंच पर स्थान
चार दिवसीय इस सम्मेलन में भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत, परंपराएं और कलाकर्म को अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने प्रदर्शित करेगा। इसके साथ, अलग-अलग देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान, विरासत संरक्षण और आपसी सहयोग के नए रास्तों पर बातचीत भी होगी। इसे न केवल भोपाल, बल्कि मध्य प्रदेश की पहचान को वैश्विक सांस्कृतिक मानचित्र पर और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।