BRICS सम्मेलन में वैश्विक कूटनीति: 14 देशों की मौजूदगी में भारत की अध्यक्षता में संपन्न हुआ 11वां संस्कृति ट्रैक
भोपाल में भारत की अध्यक्षता में आयोजित BRICS सांस्कृतिक सम्मेलन-2026 का समापन हुआ। 14 देशों के 55 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और 'भोपाल घोषणा' को स्वीकार किया।
14 countries issue Bhopal Declaration at BRICS summit
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में चार दिनों से संचालित BRICS सांस्कृतिक सम्मेलन-2026 का शनिवार को आधिकारिक समापन हो गया। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस बहुस्तरीय सम्मेलन के अंतिम दिन BRICS देशों के संस्कृति मंत्रियों की बैठक संपन्न हुई, जिसमें सर्वसम्मति से 'भोपाल घोषणा' को स्वीकार किया गया। इस वैश्विक सम्मेलन में भारत सहित कुल 14 देशों के 55 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लेकर अंतर-सांस्कृतिक संबंधों को नया आयाम दिया।
14 देशों का वैश्विक प्रतिनिधित्व और बैठकों का दौर
संस्कृति मंत्रियों की इस उच्चस्तरीय बैठक में 10 BRICS सदस्य देशों तथा 4 साझेदार देशों ने सहभागिता की। सम्मेलन में ब्राजील, चीन, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधियों ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया, जबकि मिस्र ने ऑनलाइन माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके साथ ही बेलारूस, क्यूबा, कजाखस्तान और थाईलैंड जैसे साझेदार देशों की भागीदारी ने इस आयोजन के वैश्विक महत्व को रेखांकित किया।
सम्मेलन के दौरान विभिन्न देशों के बीच मंत्री और सचिव स्तर पर द्विपक्षीय बैठकें भी आयोजित की गईं, जिनमें साझा हितों के नए क्षेत्रों की पहचान और द्विपक्षीय सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने पर बल दिया गया।
वाराणसी से भोपाल तक का संस्थागत सफर
केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने जानकारी दी कि यह BRICS संस्कृति ट्रैक की 11वीं बैठक थी। भारत की अध्यक्षता में इस प्रक्रिया की शुरुआत अप्रैल 2026 में ऑनलाइन कार्य समूह बैठक से हुई थी। इसके बाद 4-5 जून को वाराणसी में दूसरी और 5-6 अगस्त को भोपाल में तीसरी कार्य समूह बैठक संपन्न हुई। 8 अगस्त को संस्कृति मंत्रियों की अंतिम बैठक के साथ भोपाल घोषणा पत्र जारी हुआ, जिसमें पहली बार सांस्कृतिक सहयोग के लिए समयबद्ध लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
भोपाल घोषणा पत्र की मुख्य प्राथमिकताएं
'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता' विषय पर आधारित इस घोषणा पत्र में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर वैश्विक सहमति बनी:
- सांस्कृतिक संपदाओं की वापसी: विदेशों में मौजूद अवैध या चोरी की गई ऐतिहासिक संपदाओं की पहचान, उद्गम स्थल के शोध और उनकी मूल देश वापसी हेतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तकनीकों का प्रयोग।
- कलाकारों के अधिकार: AI प्लेटफॉर्म्स में कॉपीराइट सामग्री के इस्तेमाल में पारदर्शिता लाना और रचनाकारों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- डिजिटल रोडमैप: संग्रहालयों, पुस्तकालयों व अभिलेखागारों के बीच नेटवर्किंग, दस्तावेजों का डिजिटलीकरण और पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण।
- भारतीय पहल: BRICS देशों के कलाकारों को आपस में जोड़ने के उद्देश्य से भारत द्वारा 'स्वैच्छिक कलाकार रजिस्ट्री' की पायलट शुरुआत।
सांची, भीमबेटका और स्थानीय व्यंजन बने आकर्षण का केंद्र
सम्मेलन में आए अंतरराष्ट्रीय अतिथियों को मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का प्रत्यक्ष अनुभव कराया गया। प्रतिनिधियों ने सांची स्तूप का गाइडेड टूर किया, चेतियागिरी मंदिर के दर्शन किए और 3D प्रोजेक्शन मैपिंग व लाइट एंड साउंड शो के माध्यम से बौद्ध स्थापत्य कला को समझा। अतिथियों के प्रस्थान से पूर्व विश्व प्रसिद्ध प्रागैतिहासिक स्थल भीमबेटका शैलाश्रय के भ्रमण की व्यवस्था भी की गई है। इसके अतिरिक्त, मेहमानों का आतिथ्य दाल-बाफला, निमोना, रिकमच, चंबल का थोपा, चंदिया और कोदो-कुटकी जैसे मिलेट आधारित पारंपरिक स्थानीय व्यंजनों से किया गया।