Ujjain Handloom Center: हथकरघा को बढ़ावा, महिलाओं को प्रशिक्षण से रोजगार तक जोड़ने की तैयारी
उज्जैन में हैण्डलूम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की शुरुआत हुई है। महिलाओं को छह महीने का प्रशिक्षण देने के साथ हथकरघा उत्पादों की बिक्री और बाजार तक पहुंच बढ़ाने की पहल की गई है।
Ujjain Handloom Center
मध्य प्रदेश में, उज्जैन के भीतर हथकरघा उद्योग को थोड़ा और बल देने के लिए ‘हैण्डलूम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ नाम से एक नया सेंटर शुरू किया गया है, थोड़ा सा हल्ला सा वाला, लेकिन असल में लक्ष्य तय है। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर रोड वाले हिस्से में बाबा साहब नातू सामुदायिक भवन के पास इस केंद्र का शुभारंभ किया। इसका इरादा पारंपरिक बुनाई को बढ़ाना है, और महिलाओं के साथ स्थानीय बुनकरों को काम के मौके दिलाना है, जिससे रोजगार वाली राह साफ हो।
छह महीने का प्रशिक्षण, साथ में घर से काम का भी मौका
सेंटर के अंदर महिलाओं को करीब छह महीने तक हथकरघा की बुनियादी training दी जाएगी। इसमें चरखा चलाना, लूम संचालित करना, बुनाई और कपड़ा बनाने वाली तकनीकें सिखाई जाएंगी। आगे चलकर प्रशिक्षण पूरा हो जाए तब महिलाएं घर से भी यह काम कर सकेंगी, यानी पारिवारिक जिम्मेदारी के साथ भी आजीविका वाली दिशा बन सकेगी। अनुमान ये भी है कि इससे उन्हें आत्मनिर्भर बनने का बेहतर रास्ता मिलेगा, और आय लगभग 15 से 20 हजार रुपये प्रतिमाह तक जा सकती है , अगर सब ठीक रहा।
उज्जैन में कॉटन के बाद रेशम उत्पादन पर जोर
हथकरघा क्षेत्र को फैलाने के लिए उज्जैन में कॉटन और दूसरे कपड़ों के निर्माण को फिर से बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। बाद में, रेशम उत्पादन को भी प्लान में जोड़ा जाएगा, ताकि विविधता के साथ मार्केट में मांग भी पकड़ी जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लूम संचालन के जरिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर निकलेंगे। साथ ही सेंटर की पहली मंजिल पर नियमित तौर पर प्रशिक्षण चलाने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि निरंतरता बनी रहे और सीखने का सिलसिला रुके नही ।
उत्पादों की बिक्री के लिए शोरूम बनाने की तैयारी
हथकरघा से तैयार किए गए सामान को ग्राहकों तक पहुँचाने के लिए केंद्र के भूतल पर एक शोरूम बनाया जाएगा। इससे स्थानीय महिलाएं और बुनकर अपने उत्पाद सीधे लोगों तक पहुंचा पाएंगे, वो भी बिना बीच की लंबी कसरत किए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने महिलाओं से भी बातचीत की, और खुद चरखा चलाकर हथकरघा गतिविधि का हिस्सा बनी, ऐसा माहौल था जैसे वे सीधे हाथ में चीजें लेकर समझ रहे हों कि काम कैसे होता है।
मृगनयनी के डिजिटल बाजार से जुड़ेंगे कारीगर
स्थानीय हथकरघा और शिल्प उत्पादों को बड़े बाजार तक ले जाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि मृगनयनी, देश का पहला सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के स्वामित्व वाला ओडीओपी केंद्रित डिजिटल प्लेटफॉर्म बना है। इसके जरिए मध्य प्रदेश के कारीगरों, बुनकरों और शिल्पकारों को देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। साथ ही खादी और ग्रामोद्योग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि केवल प्रशिक्षण ही ना रहे, बल्कि बिक्री और पहचान भी बने।