सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद MP में TET पर कानूनी पेच: उमंग सिंघार ने मांगा विशेष विधानसभा सत्र
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के बाद मध्य प्रदेश में सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्यता बड़ा कानूनी मुद्दा बन गई है। नेता प्रतिपक्ष ने 1.50 लाख शिक्षकों के विधिक संरक्षण के लिए विशेष सत्र की मांग की है।
TET अनिवार्यता मामले में उमंग सिंघार की विशेष सत्र बुलाने मांग
मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के विधिक नियमों और सेवा शर्तों को लेकर उपजे विवाद पर कानूनी हल निकालने की मांग तेज हो गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने टीईटी अनिवार्यता से बने प्रशासनिक और विधिक गतिरोध को दूर करने के लिए मध्य प्रदेश के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री को पत्र प्रेषित किया है। उन्होंने इस पूरे मामले के विधायी समाधान के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की आधिकारिक मांग रखी है।
विधायी चर्चा और 1.50 लाख शिक्षकों के संरक्षण की मांग
सिंघार ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि शिक्षकों के विधिक अधिकारों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मध्य प्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र तुरंत बुलाया जाए। सदन के भीतर कानून के दायरे में टीईटी के प्रावधानों पर गहन समीक्षा की जाए, ताकि राज्य के करीब 1.50 लाख प्रभावित शिक्षकों और उनके आश्रितों के वैधानिक हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
सेवा निरंतरता और प्रमोशन पर कानूनी तलवार
नेता प्रतिपक्ष ने अपने पत्र में कानूनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों पर टीईटी थोपे जाने से उनकी सेवा-निरंतरता, पदोन्नति और मिलने वाले वैधानिक सेवा परिलाभों पर तलवार लटक गई है। नियमों के इस टकराव के कारण राज्य के लगभग 1.50 लाख शिक्षकों और उनके परिवारों के सामने विधिक और आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 और 29 मई 2026 के फैसलों का हवाला
उमंग सिंघार ने पत्र में कानूनी पृष्ठभूमि रखते हुए बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 1 सितंबर 2025 तथा 29 मई 2026 को दिए गए न्यायिक निर्णयों के परिप्रेक्ष्य में टीईटी का मामला अत्यंत महत्वपूर्ण हो चुका है। ऐसे में प्रदेश सरकार को कानून सम्मत रास्ता निकालते हुए शिक्षकों के भविष्य और उनके परिवारों के संरक्षण के लिए सदन के माध्यम से ठोस निर्णय लेना चाहिए।
तमिलनाडु विधानसभा के वैधानिक संकल्प का दिया उदाहरण
नेता प्रतिपक्ष ने पत्र में तमिलनाडु विधानसभा द्वारा 25 अगस्त 2026 को पारित वैधानिक संकल्प का उल्लेख किया। इस प्रस्ताव में 23 अगस्त 2010 से पूर्व सेवा में आए शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से पूर्ण छूट देने और उनके प्रमोशन व सेवा हितों को वैधानिक संरक्षण देने का प्रावधान किया गया है। सिंघार ने कहा कि जब अन्य राज्य विधानसभा के जरिए अपने शिक्षकों को कानूनी सुरक्षा दे सकते हैं, तो मध्य प्रदेश सरकार को भी कानूनी व स्थायी समाधान के लिए तुरंत कदम उठाना चाहिए।
