छतरपुर में दो पटवारी निलंबित, एक पर सरकारी जमीन में गड़बड़ी तो दूसरे पर रिश्वत मांगने का आरोप
छतरपुर की बिजावर तहसील में प्रशासन ने दो पटवारियों को निलंबित किया है। एक पटवारी पर सरकारी जमीन में बिना अनुमति एंट्री का आरोप है, जबकि दूसरे पर जमीन के नामांतरण के बदले 10 हजार रुपए मांगने का आरोप लगाया गया। दोनों के जवाब असंतोषजनक मिलने के बाद कार्रवाई हुई।

छतरपुर कलेक्टर कार्यालय
Chhatarpur two Patwaris suspended: जिले की बिजावर तहसील में प्रशासन ने दो पटवारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। शासकीय कार्य में लापरवाही और नियमों के विपरीत आचरण के आरोपों के बाद दोनों को निलंबित कर दिया गया। कलेक्टर मृणाल मीना के निर्देश पर बिजावर SDM ने यह कार्रवाई की। दोनों कर्मचारियों को पहले कारण बताओ नोटिस देकर उनका पक्ष मांगा गया था।
लल्लू राम पर सरकारी जमीन में एंट्री का आरोप
जानकारी के अनुसार, पटवारी लल्लू राम कोंदर पर शासकीय भूमि में बिना अनुमति एंट्री किए जाने का आरोप लगाया गया है। वे पहले हल्का नंबर-06 निमानी में पदस्थ थे, जबकि वर्तमान में हल्का नंबर-01 कंजरा में जिम्मेदारी संभाल रहे थे। विभागीय स्तर पर हुई जांच में उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को शासकीय कार्य में लापरवाही और निर्धारित नियमों के विपरीत आचरण से जुड़ा माना गया। नोटिस के जवाब से प्रशासन संतुष्ट नहीं हुआ, जिसके बाद निलंबन की कार्रवाई की गई।
दूसरे पटवारी पर 10 हजार रुपए मांगने का आरोप
वहीं, दूसरी कार्रवाई पटवारी जितेंद्र कौशिक के खिलाफ हुई है। वे हल्का नंबर-25 मुड़िया में पदस्थ हैं। उन पर ग्राम वेवसा की करीब 2.598 हेक्टेयर भूमि के नामांतरण के लिए 10 हजार रुपए की मांग करने का आरोप है। मामला खसरा नंबर 16/1, 17 और 18/2 की जमीन से जुड़ा बताया गया। नामांतरण की प्रक्रिया के लिए आवेदक गिरधारी सिंह लोधी से कथित तौर पर रकम मांगी गई थी।
जवाब के बाद प्रशासन ने लिया फैसला
बिजावर SDM ने बताया कि दोनों मामलों में संबंधित पटवारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया था। प्राप्त जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए। इसके बाद दोनों कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन आदेश जारी किए गए। निलंबन अवधि में दोनों पटवारियों का मुख्यालय तहसील कार्यालय बिजावर तय किया गया है। इस दौरान उन्हें मध्यप्रदेश मूलभूत नियम-53 के प्रावधानों के अनुसार निलंबन भत्ता दिया जाएगा।
प्रशासन ने दोनों मामलों में मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 के तहत आचरण संबंधी प्रावधानों का हवाला दिया है। वहीं, मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-9 के तहत निलंबन की कार्रवाई की गई है।



