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होममध्यप्रदेशMP Industrial Corridor: जबलपुर से इंदौर तक विकास की रफ्तार, ₹3 लाख करोड़ के निवेश से इन 6 जिलों को होगा सबसे बड़ा फायदा

MP Industrial Corridor: जबलपुर से इंदौर तक विकास की रफ्तार, ₹3 लाख करोड़ के निवेश से इन 6 जिलों को होगा सबसे बड़ा फायदा

कंपनी जमीन ,और निवेश का इंतजाम देखेगी, जबकि सड़क निर्माण वाला काम संबंधित एजेन्सियों के जिम्मे रहेगा।

Bundelikhabre Team
By Bundelikhabre Team
15 Oct 2026
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MP Industrial Corridor: जबलपुर से इंदौर तक विकास की रफ्तार, ₹3 लाख करोड़ के निवेश से इन 6 जिलों को होगा सबसे बड़ा फायदा

औद्योगिक परियोजना की योजना बैठक की प्रतीकात्मक तस्वीर

सड़क बनाने का पूरा जिम्मा संबंधित एजेंसियों के पास ही रहेगा , जबकि नई कंपनी हब वाले हिस्से के लिए जमीन, जरूरी बुनियादी सुविधाओं और निवेश की व्यवस्था देखेगी। गुरुवार (15 अक्टूबर) को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में जो कैबिनेट बैठक हुई , उसमें जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए एक विशेष प्रयोजन कंपनी यानी SPV को हरी झंडी दे दी गई। इस SPV को सरकार 100 करोड़ रुपये की शुरुआती पूंजी देगी , और फिर काम की रफ्तार इसी आधार से चलेगी ।

कंपनी का ढांचा, काउंसिल का रोल

प्रस्तावित कंपनी का नाम ’जबलपुर–इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड‘ रखा गया है। यह पूरी तरह से राज्य सरकार के स्वामित्व में रहेगी। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली गवर्निंग काउंसिल कंपनी के कामकाज पर नजर रखेगी, ताकि सब कुछ सही समय और सही दिशा में चलता रहे। सरकार का मकसद साफ है— इस कॉरिडोर के जरिये बड़ा औद्योगिक निवेश खींचना, और रोजगार के नए मौके गढ़ना।

समय-सीमा, रिपोर्टें व तकनीकी काम

सरकार की बताई गई समय सीमा के मुताबिक 30 दिन के अंदर कंपनी का गठन हो जाना चाहिए। छह महीने में पूरे कॉरिडोर की GIS मैपिंग भी कराई जाएगी, साथ ही लैंड बैंक भी तैयार होगा। 12 महीने में प्राथमिक औद्योगिक हब का मास्टर प्लान और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) बनाई जाएगी। तकनीकी अध्ययन छह से नौ महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद बुनियादी सुविधाओं के विकास, जमीन आवंटन वगैरह की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, यानी असल काम धीरे धीरे जमीन पर उतरने लगेगा।

हब की जगह कैसे तय होगी

औद्योगिक हब का सही लोकेशन तय करते समय जमीन की उपलब्धता, पानी, बिजली, सड़क और बाकी कनेक्टिविटी जैसी चीजें देखी जाएंगी। निवेशकों की जरूरत और उनकी मांग भी अहम फैक्टर होगी। पहले चरण में करीब 10 हजार एकड़ में तीन से पांच प्राथमिक हब बनाने की योजना है। उद्योगों को जमीन के साथ बिजली, पानी, सड़क, सीवरेज और डिजिटल कनेक्टिविटी मुहैया कराई जाएगी।

श्रमिक आवास और दूसरी सेवाएं

योजना में श्रमिकों के लिए आवास, अस्पताल, स्कूल, कौशल विकास केंद्र, और हरित क्षेत्र भी शामिल है। इसलिए इस हब को सिर्फ फैक्ट्रियों का क्लस्टर नहीं बल्कि एक औद्योगिक टाउनशिप की तरह विकसित करने की बात है, ताकि रहने-बसने और प्रशिक्षण जैसी जरूरतें भी साथ साथ पूरी हो सकें।

आंकड़े अनुमान, असली तस्वीर DPR के बाद

मुख्यमंत्री के अनुसार मार्च 2028 तक 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आ सकता है, और करीब तीन लाख लोगों के लिए प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बनेंगे। शुरुआती आकलन में करीब 1 लाख प्रत्यक्ष रोजगार और 2 लाख से ज्यादा अप्रत्यक्ष रोजगार की संभावना बताई गई है। वहीं तीन साल के लंबे लक्ष्य में 3 लाख करोड़ रुपये से ऊपर निवेश, और 6 लाख से ज्यादा रोजगार का अनुमान रखा गया है। ये सब शुरुआती अनुमान हैं , असली तस्वीर तो DPR बनने के बाद और निवेशकों से बातचीत के बाद ही ज्यादा स्पष्ट होगी।

सात जिलों का रोल, किसमें क्या जोर

योजना जबलपुर, नरसिंहपुर, रायसेन, भोपाल, सीहोर, देवास और इंदौर— इन सात जिलों में उद्योग बढ़ाने पर केंद्रित है। हर इलाके में संसाधनों के हिसाब से फोकस अलग रहेगा। जबलपुर में इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, रक्षा और एयरोस्पेस की सहायक इकाइयां, साथ ही लॉजिस्टिक्स। नरसिंहपुर और रायसेन में खाद्य प्रसंस्करण , फूड पार्क और वेयरहाउसिंग, ताकि किसानों की उपज का भंडारण और विपणन बेहतर ढंग से हो सके। भोपाल में IT, टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स और नॉलेज सर्विसेज को बढ़ावा देने पर जोर। सीहोर और देवास में खाद्य प्रसंस्करण, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और मैन्युफैक्चरिंग। इंदौर में IT, आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र , साथ ही इंदौर-देवास-पीथमपुर के मौजूदा औद्योगिक नेटवर्क से कनेक्टिविटी का लाभ। सरकार को उम्मीद है कि इससे महाकौशल सहित पूरे प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में उद्योग को नई रफ्तार मिलेगी, और रोजगार के नए अवसर भी निकलेंगे।

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