Nana Patekar Death: 45 मिनट तक चला CPR, फिर भी नहीं बच पाए अभिनेता नाना पाटेकर
कार्डियक अरेस्ट के बाद 45 मिनट तक सीपीआर चला, पर नाना पाटेकर को बचाया नहीं जा सका।

कार्डियक अरेस्ट से नहीं बच सके नाना पाटेकर
गोवा स्थित अपने घर पर गुरुवार सुबह नाना पाटेकर को कार्डियक अरेस्ट आया। 75 साल के इस अभिनेता को करीब 45 मिनट तक सीपीआर दिया गया, मगर उनकी जान नहीं बच सकी। सुबह 5:20 बजे नाना ने आखिरी सांस ली। मेडिको-लीगल केस दर्ज हुआ है और पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा। नाना हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज कलाकार थे।
तीन दशक नहीं, सौ से ज्यादा फिल्मों की पहचान
उन्होंने 100 से भी ज्यादा फिल्मों में काम किया। गंभीर किरदारों से हल्के-फुल्के रोल तक, हर रंग में उनकी अदाकारी दिखी। हिंदी के साथ मराठी सिनेमा में भी उनकी बड़ी हिस्सेदारी रही। 'परिंदा' का अन्ना उनका वह रोल रहा, जिससे उन्हें देशभर में पहचान और नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला। बाद में 'क्रांतिवीर' (बेस्ट एक्टर) और 'अग्निसाक्षी' (बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर) के लिए भी नेशनल अवॉर्ड मिले। इस तरह उनके पास तीन राष्ट्रीय पुरस्कार रहे और 2013 में पद्मश्री का सम्मान भी।
फौज की ट्रेनिंग और मानद पद
'प्रहार: द फाइनल अटैक' में मेजर का रोल निभाने के लिए नाना ने मराठा लाइट इन्फैंट्री के साथ ट्रेनिंग की। बताया जाता है कि यह ट्रेनिंग तीन साल के आसपास चली। फिर वे टेरिटोरियल आर्मी से जुड़े, मानद कैप्टन बने और बाद में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर भी काम किया। साल 2013 में वे रिटायर हुए।
कारगिल के मोर्चे पर जवानों के साथ
कारगिल युद्ध (1999) के दौरान रक्षा मंत्री रहे जॉर्ज फर्नांडिस से मंजूरी लेकर नाना अगली पंक्ति के इलाकों में पहुंचे और करीब 15-20 दिन जवानों के साथ रहे। उनका सफर द्रास, लेह, कुपवाड़ा और सोपोर तक गया। रिपोर्ट्स में सेना की क्विक रिएक्शन टीम (QRT) के साथ उनके रहने की बात भी कही गई है। वे सैनिकों को देश के असली हीरो मानते थे। उनके मुताबिक हर व्यक्ति को अपनी हैसियत के अनुसार देश के लिए योगदान देना चाहिए।
उदय शेट्टी बनकर कॉमेडी का तड़का
'वेलकम' (2007) में गैंगस्टर उदय शेट्टी के रोल ने नाना को कॉमेडी में भी अलग जगह दिलाई। दर्शकों ने इस अंदाज़ को खूब पसंद किया। 'वेलकम बैक' में उन्होंने उसी किरदार को आगे बढ़ाया।
प्रधानमंत्री का शोक संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नाना के निधन को लेकर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि नाना की अदाकारी में गहराई थी और उनकी मौजूदगी अलग असर छोड़ती थी। मोदी ने नाना के किरदारों और रचनात्मकता का जिक्र कर कहा कि उनकी भूमिकाएं आने वाले समय में भी लोगों की याद में रहेंगी। उन्होंने नाना को खुले और बेबाक विचारों वाला बताया। हिंदी-मराठी सिनेमा में उनके योगदान को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने परिवार, मित्रों और प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त की।




