25 साल पहले दुनिया छोड़ गए गोंड कलाकार जनगढ़ की कला का कमाल, 18 करोड़ में बिकी 1999 की पेंटिंग
मध्य प्रदेश के पाटनगढ़ के गोंड कलाकार जनगढ़ सिंह श्याम की 1999 की कलाकृति मुंबई में 18 करोड़ रुपये के हैमर प्राइस पर नीलाम हुई। 2001 में निधन के बाद भी उनकी कला की पहचान कायम है।
गोंड कलाकार जनगढ़ सिंह श्याम
Painting sold for 18 crores: मध्य प्रदेश के पाटनगढ़ से निकले गोंड कलाकार जनगढ़ सिंह श्याम की कला एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कला बाजार में चर्चा में है। 2001 में दुनिया छोड़ चुके जनगढ़ श्याम की 1999 में बनाई गई एक कलाकृति मुंबई में 18 करोड़ रुपये के हैमर प्राइस पर नीलाम हुई। यह बिक्री उनकी कला की विरासत को फिर सुर्खियों में ले आई है।
पाटनगढ़ से शुरू हुआ कला का सफर
जनगढ़ सिंह श्याम का जन्म 1962 में मध्य प्रदेश के मंडला जिले के पाटनगढ़ में हुआ था। वह पर्धान गोंड समुदाय से जुड़े थे। बचपन से ही उनका जुड़ाव स्थानीय लोक परंपराओं, प्रकृति और समुदाय की कहानियों से रहा। शुरुआती दौर में वह गांव की दीवारों और आसपास उपलब्ध सतहों पर चित्र बनाया करते थे। उनकी कला में पेड़-पौधों, पक्षियों, जानवरों और लोककथाओं से जुड़े प्रतीकों की खास जगह थी। उनकी प्रतिभा पर भारत भवन के तत्कालीन निदेशक और कलाकार जे. स्वामीनाथन की नजर पड़ी। इसके बाद जनगढ़ को भोपाल आने और अपनी कला को बड़े मंच पर विकसित करने का मौका मिला।
भोपाल में पारंपरिक कला को मिला नया माध्यम
बता दें, भोपाल पहुंचने के बाद जनगढ़ श्याम ने गोंड समुदाय की पारंपरिक चित्र परंपरा को कागज और कैनवास जैसे माध्यमों में उतारना शुरू किया। इस दौरान उनकी शैली में पारंपरिक प्रतीकों के साथ नए रंग, पैटर्न और दृश्य संरचनाएं जुड़ती गईं। उनकी कला की यही विशिष्ट शैली आगे चलकर ‘जांगरह कलम’ के नाम से पहचानी गई। बारीक रेखाएं, छोटे-छोटे बिंदु, दोहराए जाने वाले पैटर्न और प्रकृति से जुड़े रूप उनकी चित्रकला की खास पहचान बने।
18 करोड़ में बिकी 1999 की कलाकृति
जानकारी के मुताबिक, मुंबई की पुंडोले गैलरी में 24 सितंबर 2026 को जनगढ़ श्याम की 1999 में बनाई गई एक बड़ी ऐक्रेलिक पेंटिंग नीलाम हुई। करीब 91×69 इंच की इस कलाकृति का अनुमानित मूल्य 4 से 6 करोड़ रुपये रखा गया था। नीलामी के दौरान इसकी बोली बढ़ते हुए 18 करोड़ रुपये के हैमर प्राइस तक पहुंची। कलाकृति में पेड़ के बीच एक आध्यात्मिक आकृति दिखाई देती है। इसके आसपास सांप और पक्षियों जैसे प्रतीक नजर आते हैं। बड़े आकार और जटिल पैटर्न के साथ यह पेंटिंग जनगढ़ श्याम की विशिष्ट शैली को दर्शाती है।
पांच दिन पहले भी बिकी थी दूसरी कलाकृति
वहीं, जनगढ़ श्याम की कला के लिए सितंबर 2026 का महीना खास रहा। 19 सितंबर को उनकी एक दूसरी कलाकृति ‘Bel Mukhota (Gond)’ करीब 2.88 करोड़ रुपये में नीलाम हुई थी। इसके महज पांच दिन बाद 24 सितंबर को उनकी दूसरी पेंटिंग 18 करोड़ रुपये के हैमर प्राइस पर बिकी। लगातार हुई इन नीलामियों के बाद जनगढ़ श्याम की कला की बाजार में मौजूदगी एक बार फिर चर्चा में आ गई।
भारत भवन ने दिया बड़ा मंच
भोपाल आने के बाद जनगढ़ श्याम को भारत भवन में काम करने का अवसर मिला। यहां उन्होंने अपनी पारंपरिक कला को नए माध्यमों में विकसित किया। 1990 में उन्होंने भारत भवन के मुख्य गुंबद पर गोंड देवता बड़ादेव से जुड़ी चित्रकारी भी की। भारत भवन से जुड़े इस दौर ने उनकी कला को देश के दूसरे हिस्सों और अंतरराष्ट्रीय कला जगत तक पहुंचने का रास्ता दिया।
विदेशों तक पहुंची जनगढ़ की कला
सूत्रों के अनुसार, जनगढ़ श्याम की कलाकृतियां भारत तक सीमित नहीं रहीं। उनकी कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रदर्शित किया गया। उन्हें पेरिस के Centre Pompidou में प्रदर्शनी के लिए आमंत्रित किया गया था। इसके अलावा उनकी कला अमेरिका और ब्रिटेन समेत कई देशों में भी प्रदर्शित हुई। उनकी चित्रकला ने पारंपरिक गोंड संस्कृति को समकालीन कला के मंच पर एक अलग पहचान दिलाई।
1985 में मिला था शिखर सम्मान
जनगढ़ श्याम को 1985 में मध्य प्रदेश का शिखर सम्मान भी मिला था। यह उनके शुरुआती करियर के दौरान मिला महत्वपूर्ण सम्मान था। इसके बाद उनकी कला की पहचान लगातार बढ़ती गई और वह गोंड चित्रकला को आधुनिक कला जगत में स्थापित करने वाले प्रमुख कलाकारों में गिने जाने लगे।
2001 में हुआ निधन
जनगढ़ सिंह श्याम का निधन 2001 में हुआ। उस समय उनकी उम्र करीब 39 वर्ष थी। कम उम्र में निधन के बावजूद उनकी कला की यात्रा उनके साथ खत्म नहीं हुई। उनकी बनाई कलाकृतियां आज भी देश-विदेश के संग्रहों, प्रदर्शनियों और नीलामियों में दिखाई देती हैं। उनके परिवार और उनसे जुड़े कलाकारों ने भी गोंड कला की इस परंपरा को आगे बढ़ाने का काम किया है।





