Chhatarpur news: चुरारन के प्राचीन हनुमान मंदिर पैदल पहुंचे धीरेंद्र शास्त्री, जानिए बाबा बागेश्वर के लिए क्यों खास है यह धार्मिक स्थल ?
Chhatarpur news: चुरारन के प्राचीन हनुमान मंदिर पहुंचे धीरेंद्र शास्त्री ने नंगे पैर दर्शन और पूजा-अर्चना की। उनके आगमन पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी और मंदिर जयकारों से गूंज उठा।

चुरारन के प्राचीन हनुमान मंदिर पहुंचे पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री
Chhatarpur news: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री छतरपुर जिले के ग्राम चुरारन स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर पहुंचे। उन्होंने मंदिर तक नंगे पैर पहुंचकर हनुमान जी के दर्शन किए और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की। इसके बाद वे महाआरती में शामिल हुए और क्षेत्र की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की।
क्यों खास है चुरारन का मंदिर?
चुरारन का यह प्राचीन हनुमान मंदिर धीरेंद्र शास्त्री की आध्यात्मिक यात्रा से विशेष रूप से जुड़ा बताया जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, करीब डेढ़ दशक पहले उन्होंने अपनी पहली भागवत कथा की शुरुआत इसी मंदिर से की थी। पहली कथा से जुड़े इस धार्मिक स्थल को उनकी साधना और कथा यात्रा के शुरुआती पड़ाव के तौर पर देखा जाता है। यही वजह है कि मंदिर से उनका जुड़ाव आज भी बना हुआ है।
हर साल दर्शन की परंपरा
स्थानीय जानकारी के मुताबिक, धीरेंद्र शास्त्री समय-समय पर चुरारन के इस मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस दौरान वे मंदिर में पूजा-अर्चना करने के साथ ग्रामीणों और श्रद्धालुओं से मुलाकात भी करते हैं। मंदिर से जुड़ी यह परंपरा स्थानीय लोगों के लिए भी खास महत्व रखती है। श्रद्धालु उनके आगमन को धार्मिक आयोजन के रूप में देखते हैं और बड़ी संख्या में मंदिर परिसर में एकत्र होते हैं।
जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर
बता दें, धीरेंद्र शास्त्री के चुरारन पहुंचने की जानकारी मिलते ही मंदिर और आसपास के इलाकों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया। पूजा और महाआरती के दौरान मंदिर परिसर में हनुमान जी के जयकारे लगाए गए। श्रद्धालुओं में उनके दर्शन को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। धार्मिक आयोजन के दौरान मंदिर परिसर का माहौल भक्तिमय बना रहा।
वहीं, मंदिर में पूजा-अर्चना और महाआरती के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने क्षेत्र के लोगों की सुख-समृद्धि की कामना की। उनके दौरे के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु मौजूद रहे।


