प्रशासनिक जवाबदेही पर सख्त सीएम मोहन यादव, भोपाल में चिंतन शिविर, कलेक्टरों से सीधे होंगे सवाल
मध्य प्रदेश में कानून व्यवस्था और योजनाओं के कड़े क्रियान्वयन को लेकर भोपाल में सितंबर में चिंतन शिविर का आयोजन होने जा रहा है। सीएम मोहन यादव और मंत्री सीधे कलेक्टर-कमिश्नर से मैदानी हकीकत पर सवाल पूछेंगे।
MP में पहली बार चिंतन शिविर, मंत्री-अफसर करेंगे मंथन
मध्य प्रदेश में प्रशासनिक कसावट, नियमों के कड़ाई से पालन और जनकल्याणकारी योजनाओं की जमीनी निगरानी के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बड़ा कदम उठाया है। सितंबर महीने में राजधानी भोपाल में दो दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें कैबिनेट के सभी मंत्रियों के साथ शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहेंगे। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य सरकार के पिछले ढाई साल के निर्णयों और कानून-व्यवस्था से जुड़े विकास कार्यों की समीक्षा कर आगामी ढाई वर्षों की कार्ययोजना तय करना है।
संकल्प पत्र के अनुपालन और विभागीय लक्ष्यों की कड़ी समीक्षा
शिविर के दौरान मंत्रियों को 3 से 4 विभागों के छोटे समूहों में बांटा जाएगा ताकि हर विभाग की कार्यप्रणाली की बारीकी से जांच हो सके। प्रत्येक समूह में विभागीय योजनाओं की वास्तविक प्रगति, तय समय-सीमा में लक्ष्यों की प्राप्ति और सामने आ रही प्रशासनिक अड़चनों पर कड़ाई से चर्चा होगी। बीजेपी के संकल्प पत्र में तय किए गए वैधानिक और नीतिगत वादों के आधार पर अगले ढाई साल के कड़े लक्ष्य तय किए जाएंगे।
कलेक्टर, कमिश्नर और एसीएस से सीधे सवाल-जवाब का कड़ा ढांचा
प्रशासनिक नियंत्रण को मजबूत करने के लिए जिलों के कलेक्टरों और संभागीय कमिश्नरों को भी इस सत्र में तलब किया गया है। इसके अलावा अतिरिक्त मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। प्रभारी मंत्री अपने जिलों की वास्तविक सुरक्षा, अपराध नियंत्रण, विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं की स्थिति पर सीधे मैदानी अफसरों से सवाल-जवाब करेंगे ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो।
प्रोटोकॉल खर्च में कटौती: पचमढ़ी के बजाय भोपाल में सख्त व्यवस्था
सुरक्षा और प्रशासनिक प्रोटोकॉल के अनावश्यक खर्च को रोकने के लिए आयोजन स्थल में बड़ा फेरबदल किया गया है। पूर्व में वर्ष 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पचमढ़ी में चिंतन शिविर किया था, जहां भारी सुरक्षा और प्रशासनिक अमला तैनात करना पड़ा था। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे भोपाल में आयोजित कराने का निर्देश दिया है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था सुगम होगी और सरकारी राजस्व की अनावश्यक बर्बादी रुकेगी।
2027 के चुनावों और प्रशासनिक स्थिरता पर मंथन
चिंतन शिविर में कानून-व्यवस्था और 2027 में प्रस्तावित नगरीय निकाय व त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की निष्पक्ष तैयारियों की समीक्षा होगी। इसके अलावा छात्र संघ, सहकारिता, कृषि मंडी और जल उपभोक्ता संस्थाओं के चुनावों के शांतिपूर्ण और पारदर्शी संचालन के लिए योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन को सुदृढ़ करने पर बल दिया जाएगा।
प्रशासनिक जवाबदेही से तैयार होगा ढाई साल का खाका
सितंबर में भोपाल में होने वाले इस शिविर के माध्यम से मंत्री और अधिकारी मिलकर शासन के ढाई साल के काम की विधिक और प्रशासनिक समीक्षा करेंगे, जिससे आने वाले ढाई वर्षों के लिए प्रदेश में सुदृढ़ और जवाबदेह शासन का रोडमैप लागू किया जा सके।

