शाजापुर में कृष्णमृगों को सुरक्षित जंगलों में भेजने का अभियान तेज, अब तक 1,236 से ज्यादा रेस्क्यू
शाजापुर में अब तक 1,236 से ज्यादा कृष्णमृगों और नीलगायों का रेस्क्यू किया गया है। CM मोहन यादव ने अभियान का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

शाजापुर में 1,236 से ज्यादा वन्यजीवों का रेस्क्यू
मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में कृष्णमृग और नीलगायों को सुरक्षित वन क्षेत्रों में पहुंचाने का काम जारी है। अभियान के दूसरे चरण का मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निरीक्षण किया। रंथभंवर में उन्होंने हेलीकॉप्टर से अभियान की प्रगति देखी और अधिकारियों से व्यवस्थाओं की जानकारी ली। अब तक 1,236 से अधिक कृष्णमृगों और नीलगायों का रेस्क्यू किया जा चुका है, जबकि दूसरे चरण में 2,000 कृष्णमृगों को स्थानांतरित करने का लक्ष्य है।
वन क्षेत्रों में भेजे जा रहे हैं कृष्णमृग और नीलगाय
रेस्क्यू किए गए वन्यजीवों को श्योपुर के जंगलों, गांधी सागर और रानी दुर्गावती रिजर्व फॉरेस्ट समेत निर्धारित स्थानों पर भेजा जा रहा है। इसके लिए 11 ट्रकों की व्यवस्था की गई है। यात्रा के दौरान पशु चिकित्सक और जरूरी उपकरण भी उपलब्ध कराए गए हैं।
फसलों को नुकसान से बचाने के लिए शुरू हुई पहल
शाजापुर में कृष्णमृग और नीलगायों के कारण किसानों की फसलों को नुकसान होने की समस्या को देखते हुए पिछले साल यह अभियान शुरू किया गया था। इसके तहत जानवरों को चोट पहुंचाए बिना ऐसे वन क्षेत्रों में ले जाने की योजना है, जहां उनके लिए अनुकूल वातावरण मौजूद हो।
दक्षिण अफ्रीका की टीम कर रही मदद
रेस्क्यू के लिए दक्षिण अफ्रीका की विशेषज्ञ टीम की सहायता ली जा रही है। वन विभाग बोमा पद्धति से वन्यजीवों को पकड़ता है। इस प्रक्रिया में खास रास्तों और घेरों की मदद से जानवरों को एक स्थान पर लाया जाता है, फिर उन्हें सावधानी से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाता है।
मुख्यमंत्री ने कैमोफ्लाज्ड मचान से चल रहे रेस्क्यू कार्य को देखा और अधिकारियों से पूरी प्रक्रिया की जानकारी ली।
वन्यजीवों को चोट से बचाने पर जोर
CM मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों के साथ प्रकृति और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए भी प्रतिबद्ध है। अभियान के दौरान जानवरों को चोट न पहुंचे और उनका तनाव कम रहे, इसका ध्यान रखा जा रहा है।
उन्होंने इस पहल को दक्षिण एशिया में अपनी तरह का पहला प्रयास बताया और अभियान में जुटी टीम की सराहना की।
31 अक्टूबर तक चलेगा अभियान
यह अभियान 9 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चलना है। दूसरे चरण में 2,000 कृष्णमृगों को सुरक्षित वन क्षेत्रों में स्थानांतरित करने का लक्ष्य रखा गया है। निरीक्षण के दौरान जनप्रतिनिधियों के साथ वन विभाग, प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौजूद रहे।


