13% होल्ड अभ्यर्थियों के लिए सरकार को 3 दिन की मोहलत, OBC महासभा ने मुख्यमंत्री को सौंपा 14 सूत्रीय मांगपत्र
मध्य प्रदेश में 27% OBC आरक्षण और 13% होल्ड अभ्यर्थियों की भर्ती को लेकर ओबीसी महासभा ने सरकार को 2-3 दिन का समय दिया है। CM मोहन यादव से मुलाकात के बाद संगठन ने 28 अक्टूबर को संभागीय स्तर पर ज्ञापन देने और ठोस राहत नहीं मिलने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।
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OBC महासभा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को 14 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा।
MP OBC Reservation: मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण और लंबित नियुक्तियों का मुद्दा फिर चर्चा में है। 27% आरक्षण की बहाली और 13% होल्ड श्रेणी के अभ्यर्थियों को भर्ती में अवसर देने की मांग को लेकर ओबीसी महासभा ने सरकार से जल्द निर्णय लेने को कहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद संगठन ने 2 से 3 दिन का समय देते हुए चेतावनी दी कि ठोस पहल नहीं हुई, तो 28 अक्टूबर को संभागीय स्तर पर ज्ञापन देकर आंदोलन आगे बढ़ाया जाएगा।
CM से मुलाकात में आरक्षण और भर्ती पर चर्चा
सूत्रों के अनुसार, ओबीसी महासभा के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने आरक्षण और लंबित भर्तियों से जुड़े मुद्दे रखे। सरकार ने 13% होल्ड श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए पदों की संख्या बढ़ाकर भर्ती का रास्ता निकालने की संभावना पर काम करने का आश्वासन दिया है।
महासभा ने कहा कि 27% OBC आरक्षण की बहाली के मामले में सरकार को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। संगठन के पदाधिकारियों का मानना है कि प्रभावित उम्मीदवारों को राहत देने के लिए केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं है, बल्कि ठोस और समयबद्ध कदम उठाए जाने चाहिए।
20 साल से सत्ता में रहने के बावजूद नया कानून क्यों नहीं?
महासभा ने सरकार से सवाल किया कि यदि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बनाया गया कानून उचित नहीं था, तो करीब 20 साल से सत्ता में रहने के बावजूद नया कानून बनाने की दिशा में पहल क्यों नहीं की गई। संगठन ने मांग की कि सरकार आरक्षण से जुड़े कानूनी विकल्पों पर गंभीरता से काम करे, ताकि 27% OBC आरक्षण की बहाली के मुद्दे पर आगे बढ़ा जा सके। महासभा ने इस मामले में स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करने की भी मांग की है।
13% होल्ड अभ्यर्थियों की भर्ती पर क्या आश्वासन मिला?
महासभा के अनुसार, बैठक में 13% होल्ड श्रेणी में रखे गए उम्मीदवारों की नियुक्ति का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार इस मामले में अदालत का रुख कर रही है और कानूनी प्रक्रिया में समय लग सकता है। इसके साथ ही प्रभावित अभ्यर्थियों को भर्ती का अवसर देने के लिए अतिरिक्त पदों की संभावना तलाशने की बात कही गई। संगठन ने इस दिशा में जल्द प्रगति की मांग की है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में अतिरिक्त पदों की संख्या या नियुक्तियों की निश्चित समयसीमा का उल्लेख नहीं है।
28 अक्टूबर को संभागीय स्तर पर ज्ञापन देने की तैयारी
बता दें, ओबीसी महासभा ने सरकार को अगले 2 से 3 दिन में ठोस कदम उठाने का समय दिया है। यदि इस अवधि में प्रभावित अभ्यर्थियों को राहत देने के लिए कोई स्पष्ट पहल नहीं होती, तो 28 अक्टूबर को संभागीय स्तर पर ज्ञापन सौंपे जाएंगे। इसके बाद प्रदेशव्यापी आंदोलन की आगे की रणनीति तैयार की जा सकती है। इससे पहले 15 अक्टूबर को महासभा ने जबलपुर हाईकोर्ट के अंतरिम फैसले के बाद प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में ज्ञापन और प्रदर्शन किए थे।
14 सूत्रीय मांगपत्र में कानूनी विशेषज्ञों का पैनल बनाने की मांग
जानकारी के मुताबिक, महासभा ने मुख्यमंत्री को 14 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा। इसमें हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ताओं, संविधान विशेषज्ञों और आरक्षण मामलों के जानकारों का पैनल गठित करने की मांग की गई। संगठन ने 50% आरक्षण सीमा और असाधारण परिस्थितियों से जुड़े कानूनी प्रावधानों का अध्ययन कराने का सुझाव भी दिया। इसके अलावा, इंद्रा साहनी और लक्ष्मणराव पाटिल फैसलों के संदर्भ में मध्य प्रदेश की सामाजिक, ऐतिहासिक और क्षेत्रीय परिस्थितियों की समीक्षा कराने की मांग रखी गई।
OBC वर्ग की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सर्वे कराने की मांग
साथ ही, महासभा ने OBC वर्ग की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति का व्यापक सर्वे कराने की मांग की है। इसमें सरकारी सेवाओं, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, रोजगार और ग्रामीण-शहरी असमानताओं से जुड़े पहलुओं का आकलन शामिल करने का सुझाव दिया गया।
संगठन ने 2023 की बंसल आयोग रिपोर्ट की स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति से समीक्षा कराने की मांग भी रखी। इसके तहत रिपोर्ट के आंकड़ों की पर्याप्तता और विभिन्न सरकारी विभागों, संवर्गों तथा पद-स्तरों पर OBC प्रतिनिधित्व का आकलन करने की बात कही गई। महासभा ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से परामर्श लेने का सुझाव भी दिया।
लंबित नियुक्तियों की समीक्षा और नोडल अधिकारी की मांग
महासभा ने MPPSC, कर्मचारी चयन मंडल और अन्य भर्ती संस्थाओं में 13% होल्ड से प्रभावित पदों तथा लंबित नियुक्तियों की समीक्षा करने की मांग की। संगठन चाहता है कि भर्ती में देरी कम करने के लिए संबंधित विभागों की जिम्मेदारी तय की जाए।
उच्च, तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा में आरक्षण के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए विशेषज्ञ समिति या आयोग गठित करने का सुझाव भी दिया गया। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट में पैरवी, सर्वे और लंबित भर्तियों के बीच तालमेल बनाने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय या संबंधित विभाग में नोडल अधिकारी नियुक्त करने की मांग की गई।




