नेपाल त्रासदी: सीमा पर 400 लोग लापता, भारत ने शुरू किया अपना सबसे बड़ा रेस्क्यू मिशन
नेपाल की चीन सीमा से लगे रसुवा जिले में बाढ़ ने सुरक्षा और बचाव एजेंसियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। 400 से ज्यादा लोगों के लापता होने के बाद भारत ने IAF की मदद से 30 टन राहत सामग्री भेजने का फैसला किया है।
नेपाल बाढ़ पर PM मोदी का बड़ा कदम, 30 टन राहत भेजेगा भारत
नेपाल में चीन सीमा से लगे बेहद संवेदनशील इलाकों में आई भीषण बाढ़ ने तबाही मचाने के साथ-साथ सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी हाई अलर्ट की स्थिति पैदा कर दी है। इस भयानक बाढ़ के चलते सैकड़ों लोग लापता हैं और कई लोगों की मौत हो चुकी है। इस विकट सुरक्षा स्थिति में भारत ने नेपाल की मदद के लिए तत्काल अपने संसाधन झोंक दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बात कर इस जनहानि पर दुख जताया और सुरक्षा व राहत कार्यों में हर मुमकिन मदद का भरोसा दिया है।
सुरक्षा एजेंसियों के साथ पीएम मोदी का समन्वय
क्या आप जानते हैं कि सीमावर्ती इलाकों में आपदा कितनी खतरनाक होती है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि उनकी नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से सीधी बात हुई है। उन्होंने बाढ़ में हुए जान-माल के नुकसान पर संवेदना जताई। पीएम मोदी ने साफ संदेश दिया कि इस मुश्किल समय में भारतीय सुरक्षा और राहत एजेंसियां नेपाल के लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं। उन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन में हर तरह के सहयोग की पेशकश की है।
IAF के दो विमानों से 30 टन राहत सामग्री होगी रवाना
भारत सरकार ने नेपाल की मदद के लिए एक बड़ा लॉजिस्टिक मिशन शुरू कर दिया है। सुरक्षा और रक्षा सूत्रों के मुताबिक, करीब 30 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी जा रही है। इसके लिए भारतीय वायुसेना (IAF) के दो विमानों को एक्टिवेट किया गया है। पहला विमान बुधवार को ही राहत सामग्री लेकर नेपाल के लिए रवाना कर दिया जाएगा, जबकि स्थिति का आकलन करते हुए दूसरा विमान गुरुवार को भेजा जाएगा।
400 लापता, सीमावर्ती रसुवा जिले में भारी नुकसान
सुरक्षा रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल-चीन सीमा से सटे रसुवा जिले में अचानक आई इस बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। अब तक 400 से अधिक लोगों के लापता होने का आधिकारिक डेटा सामने आया है, और 16 से ज्यादा लोगों की मौत बताई जा रही है। रसुवा के अलावा धादिंग और नुवाकोट जिलों का इंफ्रास्ट्रक्चर बुरी तरह चरमरा गया है। सड़क और पुल टूटने से सुरक्षा बलों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
105 भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर मंडराया खतरा
इस पूरी घटना का सबसे गंभीर पहलू हमारे 105 भारतीय नागरिकों की सुरक्षा है। नेपाल पर्यटन बोर्ड के मुताबिक रसुवा में 384 यात्री लापता हैं, जिनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली हैं। इन लापता विदेशियों में 105 भारतीय और 37 अप्रवासी भारतीय (NRI) शामिल हैं। इसके साथ ही अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों के नागरिक भी प्रभावित हैं। इन सभी की सुरक्षित वापसी के लिए सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है।
नेपाल की अंतरराष्ट्रीय अपील पर भारत का क्विक रिस्पॉन्स
इस भीषण बाढ़ से निपटने के लिए नेपाल सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, खासकर भारत और चीन से तुरंत मदद मांगी है। भारत ने बिना समय गंवाए तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए वायुसेना के विमानों से मदद भेजने का फैसला किया। भारतीय वायुसेना के विमानों के जरिए सुरक्षित रास्तों से खाने और मेडिकल का जरूरी सामान सीधा प्रभावित इलाकों तक पहुंचाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।
रेस्क्यू और रिकवरी एजेंसियों की अग्निपरीक्षा
फिलहाल, बाढ़ प्रभावित इलाकों में सेना और सुरक्षा एजेंसियों का राहत व बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। 400 से ज्यादा लोगों के लापता होने के कारण प्रशासन के सामने उन्हें जिंदा तलाशने और सुरक्षित निकालने की सबसे बड़ी चुनौती है। भारत की ओर से भेजी जा रही 30 टन की राहत सामग्री से वहां की सुरक्षा एजेंसियों और प्रभावित लोगों को इस आपदा से लड़ने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी।

