'एक व्यक्ति-एक पद' के नियम के तहत मोदी कैबिनेट में फेरबदल की तैयारी, नए चेहरों को मिलेगा मौका
भाजपा के 'एक व्यक्ति-एक पद' के संगठनात्मक नियम और प्रशासनिक जवाबदेही के तहत मोदी कैबिनेट में फेरबदल की तैयारी की जा रही है। संगठन में पद पाने वाले मंत्रियों को कैबिनेट से हटाया जा सकता है।
मोदी कैबिनेट से इन मंत्रियों की हो सकती है छुट्टी!
संवैधानिक नियमों, संगठनात्मक अनुशासन और प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार मोदी कैबिनेट में बड़ा पुनर्गठन करने जा रही है। भाजपा संगठन में हाल ही में लागू की गई नई व्यवस्थाओं के बाद अब मंत्रिमंडल के स्तर पर नियमों के अनुपालन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सरकार अपने ढांचे को नया रूप दे रही है। पार्टी के 'एक व्यक्ति-एक पद' के बुनियादी सिद्धांत के तहत संगठन में बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे मंत्रियों को कैबिनेट से मुक्त कर नए चेहरों को जिम्मेदारी दी जा सकती है।
संवैधानिक सीमा 81 मंत्रियों की, 6-7 नए चेहरों की होगी नियुक्ति
संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार केंद्रीय मंत्रिपरिषद में अधिकतम 81 मंत्री हो सकते हैं, जबकि वर्तमान में 69 मंत्री पदस्थ हैं। 12 रिक्तियों के बावजूद सरकार अनुशासन और कार्यक्षमता के आधार पर 6 से 7 नए चेहरों को ही शपथ दिलाने पर विचार कर रही है। इसमें पूर्व मंत्री अनुराग ठाकुर के नाम पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। साथ ही उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और कर्नाटक जैसे रणनीतिक राज्यों को प्रतिनिधित्व देकर कानूनी और प्रशासनिक संतुलन साधा जाएगा।
राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष पद के बाद पीयूष गोयल पर नियमों की नजर
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को पार्टी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष नियुक्त किए जाने के बाद 'एक व्यक्ति-एक पद' के नियम के तहत उनके कैबिनेट दर्जे की समीक्षा की जा रही है। संगठन के सर्वोच्च वित्तीय पद पर आसीन होने के कारण यह सवाल उठ रहा है कि क्या वे सरकारी पद पर बने रह सकते हैं। हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक अधिसूचना या आदेश जारी नहीं किया गया है।
हर्ष मल्होत्रा और पंकज चौधरी की दोहरी भूमिका पर समीक्षा
दिल्ली भाजपा की कमान संभाल रहे हर्ष मल्होत्रा केंद्र में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री हैं, वहीं यूपी भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी वित्त राज्य मंत्री के पद पर हैं। इन दोनों नेताओं के पास दोहरे आधिकारिक पद होने के कारण नियमों के तहत उनके दर्जे की समीक्षा की जा रही है। हालांकि, उत्तर प्रदेश के रणनीतिक महत्व को देखते हुए पंकज चौधरी को मंत्री पद पर बरकरार रखने का विधिक और राजनीतिक विकल्प खुला रखा गया है।
25 नवंबर को राज्यसभा सदस्यता समाप्ति, हरदीप पुरी का मामला
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त होने जा रहा है। यदि उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर दोबारा उच्च सदन के लिए नामित नहीं किया जाता है, तो संवैधानिक नियमों के तहत उनका पद रिक्त हो जाएगा। ऐसी स्थिति में पेट्रोलियम मंत्रालय की कमान किसी अन्य नेता को हस्तांतरित की जा सकती है। इसके अतिरिक्त एथेनॉल और ईंधन नीतियों को लेकर जनता की आपत्तियों को भी नीतिगत स्तर पर देखा जा रहा है।
नितिन गडकरी का पोर्टफोलियो और प्रशासनिक स्थिरता
सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के विभाग को लेकर भी प्रशासनिक चर्चाएं चल रही हैं। एथेनॉल नीति पर इंटरनेट मीडिया पर उठी आपत्तियों के बीच विभाग बदलने के कयास लगाए जा रहे हैं। लेकिन जानकारों के मुताबिक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से उनके मजबूत रिश्ते और राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण की विधिक जिम्मेदारियों के चलते उनके विभाग में किसी प्रकार का फेरबदल करना प्रशासनिक रूप से आसान फैसला नहीं होगा।
महाराष्ट्र कोटे से सांसद श्रीकांत शिंदे की संभावित एंट्री
महाराष्ट्र में कानून व्यवस्था और राजनीतिक स्थिरता के गठबंधन प्रोटोकॉल के तहत शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे को केंद्र सरकार में शामिल किए जाने की पूरी संभावना है। पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के सांसद पुत्र को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल कर भाजपा महाराष्ट्र में अपने सहयोगी दल के साथ विधिक और राजनीतिक तालमेल को और अधिक सुदृढ़ करना चाहती है।

