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अब डॉक्टर खुद को ‘No. 1’ या ‘Best’ बताकर नहीं कर सकेंगे प्रचार, AI कंटेंट और डिस्काउंट ऑफर पर भी शिकंजा

NMC ने डॉक्टरों और अस्पतालों के विज्ञापन को लेकर नई सख्ती लागू की है। अब ‘No. 1’, ‘Best’ जैसे दावों, मरीजों की Success Stories, Paid Ranking, Discount-Cashback और भ्रामक AI कंटेंट पर रोक रहेगी। सोशल मीडिया, वेबसाइट और डिजिटल प्रमोशन भी नई गाइडलाइंस के दायरे में होंगे।

Pragati Chaurasiya
By Pragati Chaurasiya
8 Oct 2026
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अब डॉक्टर खुद को ‘No. 1’ या ‘Best’ बताकर नहीं कर सकेंगे प्रचार, AI कंटेंट और डिस्काउंट ऑफर पर भी शिकंजा

अस्पतालों के विज्ञापनों पर NMC की बड़ी कार्रवाई

NMC New Guidelines: राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) ने डॉक्टरों, अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों के प्रचार-प्रसार को लेकर नियम और सख्त कर दिए हैं। नई गाइडलाइंस के तहत डॉक्टर या अस्पताल खुद को ‘Best’, ‘No. 1’, ‘Top’, ‘Leading’ या ‘Most Trusted’ बताकर मरीजों को आकर्षित नहीं कर सकेंगे। ऐसे दावों के लिए स्वतंत्र और पारदर्शी सत्यापन जरूरी होगा।

नई व्यवस्था का मकसद मेडिकल सेवाओं के प्रचार में भ्रामक दावों पर लगाम लगाना और मरीजों को गलत जानकारी के आधार पर इलाज चुनने से बचाना है। नियम पारंपरिक विज्ञापनों के साथ-साथ सोशल मीडिया, वेबसाइट और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होने वाले प्रमोशन पर भी लागू होंगे।

मरीजों की तारीफ और Success Stories से प्रमोशन पर रोक

बता दें, NMC ने डॉक्टरों के प्रचार में मरीजों के अनुभवों और इलाज के नतीजों को इस्तेमाल करने को लेकर भी स्पष्ट सीमाएं तय की हैं। डॉक्टर मरीजों के testimonials, endorsements, reviews या success stories को अपनी सेवाओं के प्रचार का माध्यम नहीं बना सकेंगे।

किसी एक मरीज को मिले इलाज के परिणाम को भी इस तरह पेश नहीं किया जा सकेगा, जिससे लोगों को लगे कि हर मरीज को वैसा ही नतीजा मिलेगा। इलाज के परिणामों को बढ़ा-चढ़ाकर बताने या मरीजों की संख्या को उपलब्धि के तौर पर गलत तरीके से पेश करने पर भी रोक रहेगी।

डिग्री और विशेषज्ञता की जानकारी देनी होगी सही

गाइडलाइंस के मुताबिक, डॉक्टर अपनी शैक्षणिक योग्यता, मेडिकल रजिस्ट्रेशन और विशेषज्ञता की जानकारी सार्वजनिक कर सकते हैं, लेकिन यह जानकारी तथ्यात्मक और सत्यापित होनी चाहिए। किसी भी विज्ञापन या प्रचार में डॉक्टर के अनुभव या विशेषज्ञता को इस तरह प्रस्तुत नहीं किया जा सकता, जिससे मरीज के मन में उनकी योग्यता को लेकर गलत धारणा बने।

मरीज की फोटो और मेडिकल रिकॉर्ड के इस्तेमाल पर सख्ती

साथ ही गाइडलाइंस में मरीजों से जुड़ी तस्वीर, वीडियो, मेडिकल रिकॉर्ड और क्लिनिकल इमेज को विज्ञापन में इस्तेमाल करने के लिए भी नियम तय किए गए हैं। जहां कानून इसकी अनुमति देता हो, वहां आवश्यक सहमति और सुरक्षा उपायों का पालन करना जरूरी होगा। सिर्फ मरीज की अनुमति मिल जाने से उसके अनुभव या इलाज को प्रचार सामग्री में इस तरह इस्तेमाल करने की छूट नहीं मिल जाती, जिससे उसकी निजता, सम्मान या गरिमा प्रभावित हो।

Social Media पर भी लागू होंगे नए नियम

NMC ने प्रचार की परिभाषा को सिर्फ टीवी, अखबार या होर्डिंग जैसे पारंपरिक माध्यमों तक सीमित नहीं रखा है। सोशल मीडिया पोस्ट, वेबसाइट, डिजिटल मार्केटिंग, ब्लॉग, पॉडकास्ट, वीडियो और influencer marketing भी इन नियमों के दायरे में आ सकते हैं। यानी डॉक्टर या अस्पताल की ऑनलाइन मौजूदगी में भी ऐसी सामग्री से बचना होगा, जिसका उद्देश्य मरीजों को किसी खास सेवा की ओर आकर्षित करने के लिए भ्रामक या अतिरंजित दावा करना हो।

AI से बने कंटेंट को लेकर भी NMC सख्त

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए गाइडलाइंस में AI-generated और AI-assisted promotional content को भी शामिल किया गया है। अगर AI की मदद से ऐसा कंटेंट तैयार किया जाता है, जिससे डॉक्टर की योग्यता, इलाज के परिणाम, मरीज के अनुभव या अस्पताल की सेवाओं को लेकर गलत तस्वीर बनती है, तो उसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।

किसी मरीज की तस्वीर, आवाज, testimonial या clinical outcome को AI के जरिए इस तरह बदलकर दिखाना भी प्रतिबंधित है, जिससे ऐसा प्रतीत हो कि वास्तविक मरीज ने डॉक्टर या अस्पताल की सिफारिश की है, जबकि वास्तव में ऐसा नहीं हुआ। AI सिस्टम में मरीजों से जुड़ी जानकारी इस्तेमाल करते समय privacy, data security और professional ethics का पालन करना भी जरूरी होगा।

Discount, Cashback और Referral Benefits भी नहीं

गाइडलाइंस में मरीजों को किसी खास जांच, इलाज या मेडिकल प्रक्रिया के लिए आकर्षित करने के मकसद से discount, limited-time offer, coupon, cashback, gift, competition या referral benefit देने पर भी रोक लगाई गई है। NMC का जोर इस बात पर है कि मरीज चिकित्सा सेवा का चुनाव प्रचार में दिए गए लालच के बजाय वास्तविक चिकित्सा जरूरत और सही जानकारी के आधार पर करें।

Paid Ranking से बढ़ाई गई Visibility पर भी रोक

जानकारी के अनुसार, किसी डॉक्टर या अस्पताल की online ranking, search position या visibility को पैसे देकर कृत्रिम तरीके से ऊपर करना भी नियमों के दायरे में आएगा, खासकर तब जब इससे मरीजों को डॉक्टर की पेशेवर प्रतिष्ठा के बारे में गलत धारणा हो। डॉक्टर स्वास्थ्य संबंधी सामान्य और शैक्षणिक जानकारी साझा कर सकते हैं। हालांकि, ऐसी सामग्री के जरिए किसी खास डॉक्टर या अस्पताल को बेहतर साबित करने या मरीजों को वहां इलाज कराने के लिए प्रेरित करने से बचना होगा।

Surgery की Live Streaming पर भी नजर

सर्जरी या दूसरी मेडिकल प्रक्रियाओं को लाइव दिखाने या व्यावसायिक प्रचार के लिए प्रसारित करने पर भी NMC ने सीमाएं तय की हैं। किसी भी प्रसारण में आयोग के नियमों के साथ मरीज की privacy और consent का ध्यान रखना जरूरी होगा।

नियम टूटे तो Warning से Suspension तक कार्रवाई

वही, गाइडलाइंस का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की गंभीरता मामले की प्रकृति पर निर्भर करेगी। इसमें चेतावनी, ethics training, suspension और मेडिकल रजिस्ट्रेशन से जुड़ी कार्रवाई शामिल हो सकती है। गंभीर या बार-बार नियम तोड़ने वाले मामलों में कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। संबंधित कानून और नियमों के तहत आर्थिक दंड या रजिस्टर से नाम हटाने जैसी कार्रवाई का प्रावधान भी हो सकता है।

कार्रवाई से पहले मिलेगा अपना पक्ष रखने का मौका

किसी डॉक्टर या संस्था के खिलाफ सीधे दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा। पहले संबंधित पक्ष को show-cause notice देकर आरोपों पर जवाब देने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद राज्य मेडिकल काउंसिल उपलब्ध तथ्यों और संबंधित व्यक्ति या संस्था के जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई पर फैसला ले सकती है।

फैसले के खिलाफ 60 दिन में अपील का विकल्प

अगर किसी मेडिकल प्रोफेशनल को राज्य मेडिकल काउंसिल के फैसले पर आपत्ति है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत वह 60 दिनों के भीतर अपील कर सकता है। अपीलीय प्राधिकरण मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर देगा और इसके बाद निर्णय लिया जाएगा।

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