SCO सम्मेलन में आतंकवाद पर भारत का कड़ा रुख: मध्य एशिया दौरे पर रवाना हुए प्रधानमंत्री मोदी
क्षेत्रीय स्थिरता और आतंकवाद विरोधी वैश्विक सहयोग को मजबूती देने के संकल्प के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 दिवसीय मध्य एशिया दौरे पर रवाना हो गए हैं। वे ताशकंद में रक्षा वार्ता करेंगे और बिश्केक में SCO सम्मेलन को संबोधित करेंगे।
SCO से पहले मोदी का सेंट्रल एशिया मिशन
क्षेत्रीय सुरक्षा, सीमा पार आतंकवाद के खात्मे और रक्षा सहयोग को नई मजबूती देने के स्पष्ट सुरक्षा एजेंडे के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अगस्त को मध्य एशिया के चार दिवसीय आधिकारिक दौरे पर रवाना हो गए हैं। 1 सितंबर तक चलने वाले इस रणनीतिक मिशन में पीएम मोदी उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान जाएंगे। इस दौरे को यूरेशियाई क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों से निपटने और भारत की रणनीतिक-सैन्य साझेदारी को सुदृढ़ करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
ताशकंद में सुरक्षा और रक्षा सहयोग पर उच्चस्तरीय चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी सबसे पहले उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में अपनी सुरक्षा व रणनीतिक टीम के साथ पहुंचेंगे। वहां राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ होने वाली वार्ता में रक्षा क्षेत्र में सहयोग, रणनीतिक निवेश, महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षा, ऊर्जा तंत्र और लॉजिस्टिक्स सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मामलों पर सीधे तौर पर सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ करने पर मंथन होगा।
मध्य एशियाई गलियारे में रणनीतिक सुरक्षा का विस्तार
ताशकंद में आयोजित होने वाले सत्रों के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक साझेदारी के सुरक्षा पहलुओं को पुख्ता किया जाएगा। मध्य एशिया में उभरती भू-रणनीतिक चुनौतियों को देखते हुए भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए इस क्षेत्र में अपने संबंधों का विस्तार कर रहा है, जिसमें उज्बेकिस्तान एक प्रमुख स्तंभ की भूमिका में है।
ऐतिहासिक शास्त्री स्मारक और गांधी केंद्र का दौरा
अपने तय कार्यक्रम के तहत प्रधानमंत्री मोदी ताशकंद में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के स्मारक पर जाकर उन्हें नमन करेंगे। साथ ही, महात्मा गांधी केंद्र का दौरा भी उनके सुरक्षा व सांस्कृतिक कार्यक्रम में सम्मिलित है। यह दौरा दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक विश्वास और साझा शांति के सिद्धांतों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
31 अगस्त को बिश्केक में 26वां SCO शिखर सम्मेलन
उज्बेकिस्तान में द्विपक्षीय बातचीत के बाद प्रधानमंत्री 31 अगस्त को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचेंगे। यहां वे 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शीर्ष नेताओं के साथ शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। सम्मेलन के मुख्य सुरक्षा सत्र में क्षेत्रीय शांति, सीमाओं की सुरक्षा, संवेदनशील कनेक्टिविटी रूट्स और साझा आर्थिक हितों की रक्षा पर भारत अपना कड़ा पक्ष प्रस्तुत करेगा।
सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक कानून व्यवस्था की मांग
शंघाई सहयोग संगठन के सुरक्षा मंच पर आतंकवाद का पूर्ण उन्मूलन और क्षेत्रीय स्थिरता भारत के प्राथमिक मुद्दों में शामिल रहेंगे। भारत लगातार यह मांग करता रहा है कि आतंकी नेटवर्कों, उनकी फंडिंग और सीमा पार से संचालित होने वाली असामाजिक गतिविधियों के खिलाफ सदस्य देशों का कानून प्रवर्तन तंत्र मिलकर कार्रवाई करे, जिसके चलते इस सम्मेलन में भारत के रुख पर सभी की नजरें होंगी।
आगामी ब्रिक्स सुरक्षा बैठक से पूर्व महत्वपूर्ण रणनीतिक पड़ाव
मध्य एशिया का यह चार दिवसीय सुरक्षा और कूटनीतिक दौरा इस दृष्टि से भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि भारत सितंबर में ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करने जा रहा है। ताशकंद और बिश्केक में विभिन्न देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ होने वाला यह रणनीतिक विचार-विमर्श भारत की सुरक्षा प्राथमिकताओं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़े कानून प्रवर्तन की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण रहेगा।