MP बनेगा निवेश की पहली पसंद: 9वें इंटरनेशनल सोया मीट में मुख्यमंत्री का बड़ा दावा, बेहतरीन काम करने वाले बिजनेस लीडर्स सम्मानित
सोपा चेयरमैन नरेश गोयनका ने सोया उद्योग के विकास के लिए सरकार के सहयोग और मार्गदर्शन की जरूरत पर जोर दिया।

CM मोहन यादव ने किया इंदौर सोया कॉन्क्लेव को संबोधित।
सोपा के चेयरमैन नरेश गोयनका ने इंदौर के सोया कॉन्क्लेव में सोया उद्योग के विकास के लिए सरकार के सहयोग और मार्गदर्शन की जरूरत पर जोर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार (16 अक्टूबर) को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) के दो दिवसीय 9वें अंतरराष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव में शामिल हुए थे, जहां उन्होंने निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की बात भी रखी।
सोपा चेयरमैन का स्वागत भाषण
गोयनका ने स्वागत भाषण में मध्यप्रदेश को सोयाबीन उत्पादन का प्रमुख केंद्र बताया और कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में फैसले ले रही है। उन्होंने भावांतर योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि किसानों को उपज की कीमत में अंतर की राशि उपलब्ध कराने की पहल महत्वपूर्ण है।
30 लाख करोड़ के प्रस्ताव और 30% से ज्यादा पर अमल
मुख्यमंत्री ने बताया कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 में करीब 30 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले थे, और उनके अनुसार इनमें से 30 प्रतिशत से अधिक धरातल पर उतारे जा चुके हैं। सरकार का प्रयास है कि निवेश प्रस्ताव असली परियोजनाओं में बदलें और रोजगार के नए मौके बनें। राज्य सरकार कृषि, उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, एमएसएमई, खनन, स्वास्थ्य और शिक्षा में विकास की गति बढ़ाने के लिए काम कर रही है। निवेशकों से संवाद लगातार हो रहा है और उद्योगों के विस्तार के लिए कई कार्यक्रम हो रहे हैं।
कॉरिडोर, संसाधन और क्षेत्रीय रोजगार
जबलपुर, भोपाल और इंदौर क्षेत्र को मिलाकर नया इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है। गुरुवार (15 अक्टूबर) को कैबिनेट इसके लिए विशेष प्रयोजन कंपनी (SPV) को मंजूरी दे चुकी है। मुख्यमंत्री के मुताबिक सस्ती बिजली, जमीन और पानी की उपलब्धता निवेशकों को आकर्षित करती है। रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव से अलग-अलग इलाकों की संभावनाएं सामने आई हैं। सरकार का लक्ष्य स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग और क्षेत्रीय रोजगार बढ़ाना है। युवाओं के रोजगार, औद्योगिक निवेश और किसानों की आय के लिए समन्वित प्रयास हो रहे हैं, जिनमें सोयाबीन और खाद्य तेल उद्योग अहम भूमिका निभा सकते हैं।
प्रोसेसिंग और खाद्य तेल उद्योग का विस्तार
मुख्यमंत्री ने कहा कि सोयाबीन की प्रोसेसिंग, मैन्युफैक्चरिंग, निर्यात, उपभोक्ता बिक्री और रिफाइंड ऑयल की मार्केटिंग में विकास की संभावनाएं हैं। आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रसंस्करण, गुणवत्ता और उत्पादों में विविधता पर ध्यान देकर क्षेत्र को मजबूत किया जा सकता है। खाद्य तेल उद्योग का विस्तार भारत को आत्मनिर्भर बनाने में मददगार हो सकता है, और प्रोसेसिंग बढ़ने से किसानों को बेहतर कीमत, भंडारण, विपणन और मूल्य संवर्धन का फायदा मिलेगा।
प्रदेश की भूमिका
उन्होंने कहा कि देश के कुल सोयाबीन उत्पादन का करीब 45 प्रतिशत मध्यप्रदेश में होता है। मालवा सोयाबीन की राजधानी है और प्रदेश को फूड बास्केट के रूप में पहचान मिली है। खेती व सोयाबीन उत्पादन अर्थव्यवस्था के अहम आधार हैं, और खराब मौसम व अल नीनो के बावजूद किसानों ने बड़ा योगदान दिया। राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, उत्पादकता सुधारने और कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए जुटी है। सोयाबीन किसानों की आमदनी, खाद्य तेल उद्योग और प्रोटीन आधारित पोषण से जुड़ा है।
करीब 15 उद्योगपतियों को सम्मान
मुख्यमंत्री ने सोयाबीन की मैन्युफैक्चरिंग, निर्यात, प्रोसेसिंग, उपभोक्ता बिक्री और रिफाइंड ऑयल की मार्केटिंग में उल्लेखनीय काम करने वाली कंपनियों के करीब 15 उद्योगपतियों और प्रतिनिधियों को सम्मानित किया। नरेश गोयनका ने मुख्यमंत्री को शॉल और श्रीफल भेंट किया।
आयोजन और मौजूद लोग
कॉन्क्लेव 16-17 अक्टूबर को चल रहा है और उसकी थीम 'आत्मनिर्भर भारत – पावरिंग द ऑयल एंड प्रोटीन विजन' है। इसका उद्देश्य खाद्य तेल और सोयाबीन क्षेत्र की दिशा तय करना, घरेलू उत्पादन बढ़ाना और वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति मजबूत करना है। देश-विदेश के 500 से अधिक प्रतिनिधि, कृषि वैज्ञानिक, उद्योगपति, नीति निर्माता और किसान शामिल हुए। कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव, सुमित मिश्रा, सोपा के डिप्टी चेयरमैन गिरीश मतलानी, डेविश जैन, कृष्णवीर और विजय पाल समेत कई प्रतिनिधि मौजूद रहे।


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