वोटर लिस्ट में नाम हटाने की आपत्ति पर नई लिमिट, Form 7 अब अधिकतम 10 बार
चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में नाम हटाने से जुड़ी आपत्तियों के लिए फॉर्म-7 की सीमा तय कर दी है। विशेष संशोधन अवधि में कोई मतदाता अधिकतम 10 आवेदन दे सकेगा, जबकि नियमित अपडेट के दौरान एक महीने में पांच आवेदन की अनुमति होगी। नियम ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों पर लागू हैं।

ECI ने फॉर्म 7 को लेकर किए बदलाव
Election Commission Form 7 Rules: मतदाता सूची में नाम हटाने को लेकर आने वाली आपत्तियों पर भारत निर्वाचन आयोग ने नई सीमा तय कर दी है। अब कोई पंजीकृत मतदाता विशेष या संक्षिप्त मतदाता सूची संशोधन के दौरान अधिकतम 10 फॉर्म-7 आवेदन ही जमा कर सकेगा। नियमित अपडेट की प्रक्रिया में यह सीमा एक महीने में पांच आवेदन होगी। नए निर्देश ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों माध्यमों से जमा होने वाले आवेदनों पर लागू होंगे।
कर्नाटक में बड़ी संख्या में आवेदनों के बाद फैसला
जानकारी के अनुसार, फॉर्म-7 के इस्तेमाल को लेकर कर्नाटक में विवाद सामने आया था। कांग्रेस ने कई निर्वाचन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में आवेदन जमा किए जाने पर सवाल उठाए थे। बल्लारी में एक बीजेपी कार्यकर्ता द्वारा कथित तौर पर 7,561 मतदाताओं के नामों के सत्यापन या हटाने से संबंधित आवेदन दिए जाने का मामला भी चर्चा में रहा। इन आरोपों की जांच जारी है; इन्हें साबित हुआ तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। आयोग के नए निर्देशों का उद्देश्य बिना पर्याप्त आधार के बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज कराने पर अंकुश लगाना और चुनावी अधिकारियों पर बढ़ते काम के दबाव को कम करना है। तय सीमा विशेष संशोधन अवधि और नियमित अपडेट के लिए अलग-अलग रखी गई है।
पहले ऑफलाइन आवेदनों की संख्या पर स्पष्ट सीमा नहीं थी
आयोग के मुताबिक, ऑनलाइन माध्यम से एक बार में अधिकतम छह फॉर्म जमा करने की व्यवस्था पहले से थी। हालांकि, कागजी यानी फिजिकल फॉर्म बड़ी संख्या में जमा करने की स्पष्ट सीमा निर्धारित नहीं थी। ऐसे आवेदनों को स्वीकार करने के संबंध में निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों को अपने विवेक से निर्णय लेना पड़ता था। नए नियमों के तहत अब व्यक्तिगत मतदाता के लिए आवेदन की संख्या तय कर दी गई है। इससे ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन प्रक्रिया में एक समान सीमा लागू होगी।
Form 7 का इस्तेमाल किस काम के लिए होता है?
बता दें, फॉर्म-7 का उपयोग मतदाता सूची में किसी नाम को शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराने या सूची में पहले से दर्ज नाम को हटाने का अनुरोध करने के लिए किया जाता है। इसका इस्तेमाल नया नाम जोड़ने के लिए नहीं होता; नाम दर्ज कराने के लिए अलग प्रक्रिया और फॉर्म निर्धारित हैं। रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960 के नियम 13(2) के अनुसार, किसी निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने पर आपत्ति या नाम हटाने का आवेदन उसी निर्वाचन क्षेत्र की सूची में दर्ज मतदाता कर सकता है।
फॉर्म-7 जमा हो जाने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से अपने आप हट जाएगा। आवेदन पर संबंधित चुनाव अधिकारी को निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच करनी होती है। कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने भी पहले कहा था कि नाम हटाने से जुड़ी कार्रवाई में नियमों के अनुसार प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए नई सीमा के बाद अब यह देखना अहम होगा कि फॉर्म-7 के जरिए दर्ज होने वाली आपत्तियों की जांच और मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है।






